ईरान-अमेरिका गतिरोध से वैश्विक तेल बाजार में हलचल, ट्रंप बोले- शर्तें मंजूर नहीं

जुबिली स्पेशल डेस्क
मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीदों को उस वक्त करारा झटका लगा, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के जवाबी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। करीब 10 हफ्तों से जारी इस संघर्ष को थामने के लिए अमेरिका ने 6 मई को एक 14 सूत्रीय फॉर्मूला भेजा था, लेकिन ईरान की शर्तों ने सुलह की मेज पर कड़वाहट घोल दी है।
इस कूटनीतिक गतिरोध का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखा और रविवार को कच्चे तेल की कीमतों में 3 डॉलर प्रति बैरल का उछाल दर्ज किया गया।
ईरान की ‘ऑल और नथिंग’ रणनीति
ईरान ने साफ कर दिया है कि उसे किश्तों में शांति मंजूर नहीं है। तेहरान ने अपने जवाब में कुछ कड़ी शर्तें रखी हैं:
- चौतरफा युद्धविराम: ईरान का कहना है कि युद्ध हर मोर्चे पर, खासकर लेबनान में तुरंत रुकना चाहिए।
- आर्थिक क्षतिपूर्ति: युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग।
- नौसैनिक संप्रभुता: होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण अधिकार और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करने की शर्त।
- प्रतिबंधों से मुक्ति: ईरानी तेल की बिक्री पर लगी रोक हटाना और भविष्य में हमले न करने की लिखित गारंटी।
ट्रंप का कड़ा रुख: राष्ट्रपति ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा, “मुझे यह (जवाब) बिल्कुल पसंद नहीं आया, इसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।” अमेरिका की प्राथमिकता पहले युद्ध रोकना और फिर परमाणु कार्यक्रम पर बात करना है, जबकि ईरान ने इसे ‘जरूरत से ज्यादा मांग’ बताया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और ‘होर्मुज’ से पहली राहत
इस भीषण तनाव के बीच पाकिस्तान एक संकटमोचक (Mediator) की भूमिका निभा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि ईरान का जवाब अमेरिका तक पाकिस्तान के जरिए ही पहुँचाया गया। कूटनीतिक गलियारों में पाकिस्तान की इस सक्रियता को ‘भरोसा बहाली’ के तौर पर देखा जा रहा है।
समुद्री मोर्चे से बड़ी खबर
28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार कतर एनर्जी का LNG जहाज ‘अल खरैतियात’ सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर पाकिस्तान के पोर्ट कासिम पहुंचा। ईरान ने पाकिस्तान और कतर के साथ संबंधों को देखते हुए इस जहाज को रास्ता दिया, जो इस बात का संकेत है कि ईरान व्यापारिक गलियारे को ‘चुनिंदा’ तौर पर खोलने के हक में है।
परमाणु डील पर ईरान का नया पैंतरा?
वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने पर्दे के पीछे एक प्रस्ताव यह भी दिया है कि वह अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के कुछ हिस्से को कम करने और बाकी को किसी तीसरे देश भेजने के लिए तैयार है। यह कदम अमेरिका को बातचीत की मेज पर वापस लाने की एक कोशिश हो सकती है, लेकिन ट्रंप के ताजा बयान ने इस पर पानी फेर दिया है।
संकट के प्रमुख बिंदु
| मुद्दा | ईरान का स्टैंड | अमेरिका का स्टैंड |
| होर्मुज स्ट्रेट | पूर्ण संप्रभुता और टैक्स का अधिकार | अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए मुक्त रास्ता |
| प्रतिबंध | तेल बिक्री से तुरंत रोक हटे | पहले पूर्ण युद्धविराम, फिर चर्चा |
| लेबनान | इजरायल-लेबनान मोर्चे पर भी शांति जरूरी | क्षेत्रीय विस्तार पर चिंता |
बड़ी चेतावनी: तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अब दुनिया ‘डिजिटल ब्लॉक’ को लेकर डरी हुई है। अगर ईरान अंडरवाटर केबल्स पर टैक्स वसूलने या उन्हें नुकसान पहुंचाने की धमकी पर अमल करता है, तो इंटरनेट और वैश्विक डेटा ट्रांसफर पर भी संकट खड़ा हो सकता है।

