लखीमपुर खीरी घटना को लेकर राजनीति हुई तेज, कई नेता ‘नजरबंद’

जुबिली न्यूज डेस्क

लखीमपुर खीरी में हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश में इस मामले में राजनीति तेज हो गई है। विपक्षी दलों के नेता लखीमपुरखीरी पहुंचने की दौड़ में लगे हुए हैं, लेकिन योगी सरकार उन्हें जाने नहीं दे रही है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री व सपा संरक्षक अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि वो लखीमपुर खीरी जाएंगे। उनके ऐलान के बाद ही उनके घर के आगे सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और सड़कों को ब्लॉक किया गया है।

कहा जा रहा है कि सरकार ने उनके कहीं भी जाने पर रोक लगा दी गई है। उनके घर के बाहर भारी संख्या में सपा कार्यकर्ता भी जमा हो गए हैं।

हिरासत में प्रियंका गांधी

उधर देर रात कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी लखीमपुर खीरी के लिए निकली थीं लेकिन उन्हें सुबह तड़के सीतापुर में रोककर हिरासत में ले लिया गया।

इससे पहले उनकी पुलिस कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की भी हुई। कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने यह भी दावा किया कि ‘पुलिस कर्मियों ने प्रियंका गांधी पर हाथ उठाया है।’

प्रियंका को सीतापुर के पीएसी के गेस्ट हाउस में रखा गया है।

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वहीं बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र को भी लखीमपुर जाने से रोक दिया गया है। उन्होंने लखनऊ में बताया कि उन्हें नोटिस दिया है कि वो कहीं नहीं जा सकते हैं।

बसपा प्रमुख मायावती ने भी ट्वीट करके कहा है कि सतीश चंद्र मिश्र को नजरबंद किया गया है।

बसपा प्रमुख मायावती ने अगले ट्वीट में लिखा है कि ‘इस घटना में बीजेपी के दो मंत्रियों की संलिप्तता के कारण इस घटना की सही सरकारी जांच और पीडि़तों को न्याय मिलता नहीं दिखता है इसलिए इसकी न्यायिक जांच होनी चाहिए।’

इसके अलावा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह को देर रात महाराजगंज में रोक दिया गया था वो भी लखीमपुर खीरी जा रहे थे।

रविवार को लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा में 8 लोगों की मौत हुई है। उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए लखीमपुर आ रहे थे और इसके खिलाफ किसान विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे।

इसी दौरान हिंसा हो गई और इसके लिए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे और किसानों के प्रदर्शन में शामिल उपद्रवी तत्वों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

फिलहाल जिले में धारा-144 लगा दी गई है और इंटरनेट पर पाबंदी जारी है।

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