अपने ही मकड़जाल में फंसा पाकिस्तान

सुरेंद्र दुबे 

जब से भारत ने जम्‍मू-कश्‍मीर में अनुच्‍छेद 370 को निर्वाण प्राप्‍त कराया है तब से पाकिस्‍तान पूरी तरह से बौखलाया हुआ है। ऐसा लगता है जैसे महाराजा हरि सिंह ने जम्‍मू-कश्‍मीर का भारत में नहीं बल्कि पाकिस्‍तान में विलय कराया था और अनुच्‍छेद 370 के तहत उसे मनमानी करने के लिए विशेषाधिकार प्रदान किया था।

अब जब जम्‍मू-कश्‍मीर का विलय भारत में हुआ था और उसके हुक्‍मरानों ने अनुच्‍छेद 370 हटा दिया तो पाकिस्‍तान बिना  वजह क्‍यों शोर मचा रहा है। वह शायद ये भूल गया कि जिस समय अनुच्‍छेद 370 के तहत विशेषाधिकार दिए गए थे।

तब की परिस्थितियां अलग रही होंगी। पंडित जवाहर लाल नेहरू आज तक उसके लिए गरियाए जा रहे हैं। अब बदली परिस्थितियों में यदि अनुच्‍छेद 370 को बाय-बाय कर दिया गया है तो पाकिस्‍तान हाय-हाय क्‍यों कर रहा है।

अब किस तरह पाकिस्‍तान की फजीहत हो रही है इसका एक नजारा संयुक्‍त राष्‍ट्र में देखिए, जहां संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी को न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तानी नागरिक होने का दावा करने वाले एक शख्स ने मलीहा लोधी को घेर लिया और उन्हें खरी-खोटी सुनाने लगा।

जब मलीहा कार्यक्रम में मीडियाकर्मियों से बातचीत कर रही थीं, उसी वक्त एक शख्स ने हस्तक्षेप किया और कहा कि उन्हें भी कुछ सवाल पूछने हैं। उस शख्स ने कहा कि मेरे पास आपके लिए सवाल है, आप क्या कर रही है? आप पिछले 10-15 सालों से कर क्या रही हैं? पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि मलीहा लोधी पर शख्स ने ‘लोगों का पैसा चुराने’ का आरोप भी लगाया।

आपने मकड़ी के बारे में तो सुना ही होगा, जो दूसरों को फंसाने के लिए अपने इर्द-गिर्द जाल बुनती रहती है। दूसरे कीट-पतंगे कुछ दिनों तक फंसते रहते हैं और इसी लालच में मकड़ी अपना जाल बुनती रहती है और अंत में वो उसमें खुद फंस जाती है। बस ऐसी ही कुछ हालत पाकिस्‍तान की हो गई है।

अनुच्‍छेद 370 पर भारत पर दबाव बनाने के लिए उसने सबसे पहले समझौता एक्‍सप्रेस ट्रेन रद्द कर दी। भारत और पाकिस्‍तान के बीच हो रहे लगभग 14 हजार करोड़ रुपए का व्‍यापार बंद कर दिया और उसी रात अपने एयर स्पेस को भारत के लिए बंद कर दिया।

ये तीन कदम उठाने के बाद पाकिस्‍तान को लगा कि एयरस्पेस बंद करने से तो उसको भी आर्थिक नुकसान होगा, इसलिए बाद में उसने कह दिया कि उसने भारतीय विमानों के उसके आकाश से उड़ने पर कोई पाबंदी नहीं लगाई। भारत-पाक के बीच 14 हजार करोड़ रुपए का व्‍यापार बंद हो जाने से भारत को कोई ज्‍यादा फर्क नहीं पड़ने वाला है। हां, आर्थिक संकट से गुजर रहे पाकिस्‍तान का गरीबी में और आटा गीला हो जाएगा।

भारतवर्ष को क्‍या फर्क पड़ता है। हमारे यहां तो न जाने कितने विजय माल्‍या, नीरव मोदी व मेहुल चौकसी इतनी रकम लेकर विदेशों की सैर कर रहे हैं। करीब 500 उद्योगपति ऐसे हैं जो करोड़ों डकारे बैठे हैं और सरकार उनका नाम तक बताने में शर्मा रही है। अब ऐसे मिजाज के देश को पाकिस्‍तान पता नहीं क्‍या सोचकर आंखे दिखा रहा है। अब वह इस सबसे पीछे भी नहीं हट पा रहा है। वर्ना पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री अपने ही देश में मुंह दिखाने लायक नहीं रह गए हैं।

पाकिस्‍तान ने सोचा अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में घडि़याली आंसू बहाये जाएं। कोई उससे पूछे कि उसके पास रोने के लिए अपने घर में ही बहुत से कारण हैं फिर पड़ोसी की खिड़की में क्‍यों झांक रहा है। पर इमरान खान ठहरे क्रिकेट खिलाड़ी। क्रिकेट में जब खिलाड़ी को गेंद नहीं समझ में आती है तो वह अंधाधुंध बैट घुमाता है । लग गया तो बाउंड्री नहीं तो स्‍टंप उखड़ जाता है। इमरान खान बाउंड्री तो नहीं मार पा रहे हैं पर हर बॉल पर खुद ही आउट होने पर लगे हैं।

इमरान खान पहले अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप के पास कटोरा लेकर कश्‍मीर का रोना रोने गए। ट्रंप ने इमरान के कटोरे में इमदाद तो नहीं डाली पर उन्‍हें भारत की शिकायत करने के लिए जमकर फटकार लगाई। इमरान खान ने बगैर सोचे-समझे ये खुलासा कर दिया कि पाकिस्‍तान में 40 हजार आतंकवादी हैं। ऐसा उन्‍होंने अपनी मजबूरी जताने के लिए किया कि आखिर इतनी जल्‍दी आतंकवाद पर वह कैसे नकेल कस सकते हैं।

बस इसी का भारत को फायदा मिला और दुनिया को समझ में आ गया कि पाकिस्‍तान एक घनघौर आतंकवादी देश है। इसलिए सारे बड़े-बड़े राष्‍ट्र भारत के पीछे खड़े हो गए। रूस ने भी दुत्‍कार कर भगा दिया और कहा जाओ जो भी मामला है भारत से बातचीत कर निपटाओ। अब जब भारत से कोई मामला ही नहीं है , क्‍योंकि जम्‍मू–कश्‍मीर पाकिस्‍तान में नहीं हिंदुस्‍तान की ही सीमा में है तो उससे कौन और क्‍यों बात करेगा।

पाकिस्‍तान को लगा कि अमेरिका और रूस ये दोनों भले ही उसका साथ देने को न तैयार हों पर चीन तो हर हाल में उसकी तरफदारी में उतर आएगा। पर ऐसा नहीं हुआ। लद्दाख अब केंद्र शासित प्रदेश हो गया है, जहां के काफी बड़े भूभाग पर चीन ने स्‍वयं कब्‍जा कर रखा है। जैसे पाकिस्‍तान के पास पाक अधिकृत कश्‍मीर है वैसे ही चीन के पास अक्‍साई चीन है।

अब चीन पहले अपनी हड़पी हुई जमीन को बचाए कि पाकिस्‍तान की लड़ाई लड़े। सो उसने पाकिस्‍तान को ठेंगा दिखा दिया। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लल्‍लो-चप्‍पो कर चीन को समझा दिया कि हम लोग अपना मामला सुलझाते रहेंगे। पाकिस्‍तान को मुंह लगाने की जरूरत नहीं है। अब पाकिस्‍तान पूरी दुनिया में अपना तमाचा खाया मुंह लिए घूम रहा है। अब वह पीछे हटे तो कैसे। आगे बढ़ने को कोई गुंजाईश नहीं है। मकड़ी की तरह बनाए गए अपने ही जाल में पाकिस्‍तान फड़फड़ा रहा है।

(लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं, लेख उनके निजी विचार हैं)

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