Thursday - 15 January 2026 - 12:13 PM

ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तेज, 1979 के बाद सबसे बड़ा आंदोलन; भारत के लिए क्यों है अहम?

जुबिली न्यूज डेस्क

दिसंबर 2025 से ईरान में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब पूरे देश में फैल चुके हैं। 100 से ज्यादा शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं, जिन्हें 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद का सबसे बड़ा जनआंदोलन माना जा रहा है। आर्थिक संकट से शुरू हुए ये प्रदर्शन अब सीधे तौर पर सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई के शासन के खिलाफ चुनौती बन गए हैं।

प्रदर्शन की शुरुआत तेहरान के ग्रैंड बाजार से हुई, जहां व्यापारियों ने महंगाई, बेरोजगारी और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ हड़ताल की। इसके बाद आंदोलन तेजी से फैलता गया और इसमें महिलाओं व युवाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक हजारों लोगों की मौत और हजारों गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। कई इलाकों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है ईरान की स्थिति?

ईरान में जारी अस्थिरता भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक चिंता का विषय बन गई है। भारत और ईरान के बीच कई अहम परियोजनाएं चल रही हैं।

भारत ने चाबहार बंदरगाह में करीब 500 मिलियन डॉलर (लगभग 4,000 करोड़ रुपये) का निवेश किया है। यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप से जोड़ता है। चाबहार से जुड़ी चाबहार-जाहेदान रेल लाइन का काम 2026 के मध्य तक पूरा होना है।

इसके अलावा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के जरिए भारत से रूस और यूरोप तक माल पहुंचाने में समय और लागत दोनों कम होती हैं।

व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा पर असर

ईरान भारत के लिए तेल और व्यापार का भी अहम स्रोत रहा है। मौजूदा हालात के चलते:

  • तेल की वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका बढ़ गई है

  • भारत से ईरान को बासमती चावल का निर्यात लगभग ठप हो गया है

  • निर्यातकों के पेमेंट फंसने का खतरा बढ़ा है

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अस्थिरता रहने पर भारत के किसानों और व्यापारियों को नुकसान हो सकता है।

चीन को मिल सकता है रणनीतिक फायदा

ईरान में अस्थिरता का फायदा चीन उठा सकता है। चीन पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर काम कर रहा है, जो चाबहार से सिर्फ 170 किलोमीटर दूर है। अगर चाबहार परियोजना में देरी होती है, तो क्षेत्रीय संतुलन भारत के खिलाफ जा सकता है।

ईरान में फंसे भारतीय नागरिक

ईरान में हजारों भारतीय नागरिक और छात्र मौजूद हैं। हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है और भारतीयों को प्रदर्शन प्रभावित इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह ईरान के हालात पर करीबी नजर रखे हुए है। सरकार ने फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ नीति अपनाई है और ईरान के साथ संवाद बनाए रखने पर जोर दिया है।

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन भारत के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक चुनौती बनते जा रहे हैं। अगर हालात जल्द सामान्य नहीं हुए, तो चाबहार, INSTC और ऊर्जा सुरक्षा जैसे अहम भारतीय हितों पर सीधा असर पड़ सकता है।

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