Sunday - 20 October 2019 - 6:07 AM

MCI ने खोली डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान के डॉक्टरों की पोल

स्पेशल डेस्क

लखनऊ । पिछले अंक में जुबिली पोस्ट ने बताया था कि डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के चिकित्सकों को प्रोफेसर बताकर और वही के कर्मचारियों और संसाधनों के बल पर डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान ने फर्जी ढंग से एमबीबीएस का पाठ्यक्रम हासिल किया।

अब विलय के समय संयुक्त चिकित्सालय के पैरामेडिकल,लिपिक और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को संस्थान में समायोजन /प्रतिनियुक्ति पर संस्थान ने लेने से मना कर दिया है जबकि विलय से पूर्व सरकार ने लिखित रुप से समायोजन/प्रतिनियुक्ति पर लेने का आदेश जारी किया था।

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संस्थान में अयोग्य चिकित्सकों की भर्ती, लेकिन बनायेंगे एम्स

भ्रष्टाचार और भाई भतीजे वाद की भेंट चढ़े डॉ. राम लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अयोग्य चिकित्सक पद पाने में सफल हो गए और प्रमोशन भी पा गए। इस मामले में लोहिया कर्मचारी अस्तित्व बचाओ मोर्चा नामके एक संगठन ने 16 सितंबर 2019 को मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन दिया है , जिसमे गंभीर आरोप लगाए गए हैं । 

लोहिया कर्मचारी अस्तित्व बचाओ मोर्चे के अनुसार

  • 1.पूर्ववर्ती सरकार में एक कैबिनेट मंत्री के बड़े अधिकारी के बेटे डॉ विक्रम सिंह की नियुक्ति की गई और प्रमोशन भी कर दिया गया, जबकि मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया की दिनांक 9.08.2017 को रिपोर्ट में बताया गया कि डॉ विक्रम सिंह की योग्यता नियमानुसार नहीं है।                                                                                                                                                                  
  • 2.संस्थान के पूर्व मुख्य चिकित्साअधीक्षक की पत्नी डॉक्टर पूजा गुप्ता की नियुक्ति की गई है जो एकेडमिक क्वालीफिकेशन पूरी नहीं करती है। इसकी पुष्टि एमसीआई ने अपनी रिपोर्ट में कर दिया है।                                                                                            
  • 3.आंकोलाजी में शैक्षिक अर्हता रखने वाली डॉक्टर चारू महाजन जो डॉक्टर आशीष महाजन (ऑंकोलॉजी विभाग )की पत्नी हैं ,को सांठगांठ करके गाईनाकोलाजी डिपार्टमेंट में नियुक्ति दी गई है। इसका भी जिक्र एमसीआई ने 2017 की अपनी रिपोर्ट में किया है ।                                                                                                                                                                                 
  • 4.इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में तैनात डॉक्टर सचिन अवस्थी को फर्जी अनुभव दिखाकर ऑर्थोपेडिक्स में प्रोन्नत कर दिया गया ।                                                                                                                                                                                                 
  • 5.9 अगस्त 2017 को एमसीआई की रिपोर्ट में फिजियोलॉजी में तैनात डॉ रजनी बाला जसरोटिया की शैक्षिक योग्यता को नियमानुसार न होना बताया गया है। फिर भी पूर्व सरकार में एक नौकरशाह की रिश्तेदार होने के कारण इनकी नियुक्ति की गई ,बाद में प्रोन्नति भी कर दी गई ।

MCI से मिले ये साक्ष्य

मोर्चे का आरोप है कि यह तो एक बानगी है , यदि उच्च स्तर पर जांच कराई जाए तो कई चिकित्सक ऐसे मिलेंगे जो एक दूसरे के रिश्तेदार हैं और प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा, पूर्व निदेशक चिकित्सा संस्थान के गठजोड़ के भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद के कई और भी परिणाम सामने आ सकते हैं।

सूत्रों के अनुसार राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के एक पूर्व निदेशक ने स्वीकारा है कि कई चिकित्सक संस्थान में तैनात लोगों के रिश्तेदार हैं।

संस्थान में कर्मचारियों की भर्ती में प्रदेश सरकार का मापदण्ड अपनाया लेकिन संयुक्त चिकित्सालय के कर्मचारियों को ना- संस्थान में 250 स्थाई कर्मचारी तृतीय श्रेणी के तथा आउटसोर्सिंग /संविदा के 1250 कर्मचारी कार्यरत हैं। दिनांक 25 .06.2015 को डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान की निदेशक प्रोफेसर नुजहत हुसैन के अनुसार संस्थान में समस्त पदों की चयन प्रक्रिया, शैक्षिक योग्यता एवं मापदंड राज्य सरकार में निर्धारित प्रचलित प्रक्रिया के अनुसार है। संस्थान में किसी कैडर की नियमावली नहीं बनाई गई है। फिर भी राज्य सरकार (संयुक्त चिकित्सालय )के स्टाफ को संस्थान में रखने से संस्थान के भर्ती के नियम के विरुद्ध  मान रहा है।

विलय की प्रक्रिया के समय संयुक्त चिकित्सालय के सभी कर्मचारियों को समायोजन/प्रतिनियुक्ति पर लिये जाने का प्रस्ताव शासन ने स्वीकारा पर अब ना विलय के लिए तैयार किए गए प्रस्ताव में राम लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और शासन के अधिकारियों के द्वारा राम और लोहिया संयुक्त चिकित्सालय कर्मचारियों को प्रतिनियुक्ति पर लिए जाने का लिखित रूप से स्वीकार किया गया।

इसी क्रम में अरिंदम भट्टाचार्य विशेष सचिव उत्तर प्रदेश शासन द्वारा 12 जून 2015 को विलय के संबंध में जारी कार्यवृत्त में संशोधन करते हुए आदेश जारी किया कि प्रतिनियुक्ति की अवधि 1 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष का निर्णय करने का निर्णय लिया गया है।

प्रोफेसर दीपक मालवीय पूर्व निदेशक/ मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने अपने पत्र संख्या 3945 /डॉ राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान नि कै/ 2017 दिनांक 18 जनवरी 2017 के अनुसार चिकित्सकों के साथ साथ “संस्थान के विभिन्न श्रेणी( गैर शैक्षणिक) के पदों के सृजन संबंधी शासनादेश संख्या 4 673/7 1-2-16-आर-म10/20 15 दिनांक 16 नवंबर 2016 के द्वारा सृजित पदों के सापेक्ष नर्सिंग पैरामेडिकल एवं सभी प्रकार के गैर शैक्षणिक कर्मचारियों को समायोजित किया जाने का उन्होंने आश्वासन दिया,” लेकिन डॉ रजनीश दुबे प्रमुख सचिव के आदेश संख्या 1985/71-2-2019-आर एम-11/2013-टी सी चिकित्सा- दो दिनांक 27 अगस्त 2019 के अनुसार संयुक्त चिकित्सालय के 20 कार्मिकों लोकबंधु राजनारायण सिंह चिकित्सालय एवं अन्य चिकित्सालयों में स्थानांतरित करने की कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया गया।

मतलब साफ है कि कई संवर्ग के कर्मचारियों को शासन के पूर्व आदेश के बाद भी समायोजन/प्रतिनियुक्ति के लायक न समझकर संस्थान में लेने से मना कर दिया गया।

लोहिया कर्मचारी अस्तित्व बचाओ मोर्चा के अनुसार सरकारी गजट ,उत्तर प्रदेश शासन दिनांक 12 .9. 2018 द्वारा डॉ राम लोहिया चिकित्सा संस्थान को अधिनियम -2015 का प्रख्यान किया गया जिसमें संस्थान को चिकित्सा विश्वविद्यालय के रूप में मान्यता दी गई है, जिसके नियम 3(क) के अनुसार एम्स नई दिल्ली की भांति संस्थान की स्थापना की जाएगी। नियम 3.1 के अनुसार अधिनियम के प्रारंभ होने की तिथि से सोसाइटी विघटित हो जाएगी जबकि अब तक सोसाइटी में विगठित नहीं की गई और संस्थान का संचालन पूर्व की भांति बाईलाज के अनुसार चल रहा है।

कर्मचारियों को लेना न पड़े इसके लिए सही अर्हता होने के बाद भी ,वेतनमान और शैक्षिक अर्हता मनमाने ढंग से बना ली गई ।दंत स्वास्थ्य विज्ञानी का 16-1-2019 को संस्थान में पद ना होना दर्शाया गया लेकिन 21.8.20 19 में वेतन भिंन्न दिखा करके 2017 में डेंटल टेक्नीशियन के स्वीकृत पद का नाम डेंटल हाइजीनिस्ट कर दिया गया । ब्लड बैंक के समायोजन मैं ब्लड बैंक के अधिकारी को लेने के लिए संस्थान के निदेशक ने प्रस्ताव दिया है लेकिन ब्लड बैंक के कर्मचारियों को छोड़ दिया गया है। संस्थान में चल रही चर्चाओं के अनुसार ब्लड बैंक के अधिकारी किसी उच्च अधिकारी/नेता की रिश्तेदारी में आते हैं।

डा.राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान क्या इन्हीं अयोग्य डॉक्टरों के बल पर एम्स के मापदण्ड के अनुसार गंभीर मरीजों का इलाज करेगा, ? यह बहुत बड़ा सवाल है। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए । अब देखना है कि प्रदेश की योगी सरकार इन डाक्टरों को के विरुद्ध क्या कार्रवाई करती है।

संविदा/स्थाई कर्मचारियों को जिनकी भर्ती में राज्य सरकार के निर्धारित मापदण्ड अपनाये गये हैं तो फिर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय के अनुभवी और योग्य कर्मचारियों को भी अपने वादे के मुताबिक उन्हें समायोजन/ प्रतिनियुक्ति पर अवश्य रखना चाहिए ताकि एनएबीएच के जो मानक उन्होंने पूरे कराए हैं वह अपनी सेवा देते हुए संस्थान को एम्स के मानक के अनुरूप ले जाएं। इस तरह से मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ पूर्व सरकार के भ्रष्टाचारियों की टीम को अपने अपने मंसूबे में सफल नहीं होने देगी।

कहानी अभी बाकी है… अगली किश्त में जल्द एक और खुलासा… पढ़ते रहिये www.jubileepost.in

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