मायावती ने अपने विधायकों को लेकर अखिलेश को लिया निशाने पर

जुबिली न्यूज डेस्क

उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होना है। इसको देखते हुए राज्य में जोड़तोड़ की राजनीति शुरू हो गई है।

यूपी का सियासी तापमान मंगलवार को उस समय बढ़ गया जब खबर आई की बहुजन समाज पार्टी के पांच से अधिक विधायकों ने समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की है।

इस बैठक के बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया। कहा जाने लगा कि ये विधायक सपा में शामिल हो सकते हैं।

वैसे इन विधायकों को बीएसपी प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टी से अक्टूबर 2020 में ही निलंबित कर दिया था। ये विधायक हैं-असलम अली, हरगोविंद भार्गव, मोहम्मद मुज्तबा सिद्दीकी, हाकिम लाल बिंद, मोहम्मद असलम राइनी, सुषमा पटेल और वंदना सिंह ।

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वैसे इस मुलाकात को सपा और बसपा के निलंबित विधायकों ने सार्वजनिक नहीं किया है। कहा जा रहा है कि इन सात विधायकों में पांच ने अखिलेश यादव से मुलाकात की है।

कहा जा रहा है कि ये विधायक यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के बाद सपा में शामिल हो सकते हैं।

वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने मीडिया में चल रही इन खबरों को लेकर अखिलेश यादव को निशाने पर लिया है।

बुधवार को माया ने ट्वीट कर कहा, ” घृणित जोड़तोड़, द्वेष व जातिवाद आदि की संकीर्ण राजनीति में माहिर समाजवादी पार्टी द्वारा मीडिया के सहारे यह प्रचारित करना कि बीएसपी के कुछ विधायक टूट कर सपा में जा रहे हैं घोर छलावा है।”

अपने ट्वीट में मायावती ने कहा है-जिन विधायकों के सपा में शामिल होने की बात कही जा रही है उन्हें काफी पहले ही सपा व एक उद्योगपति से मिलीभगत के कारण राज्यसभा के चुनाव में एक दलित के बेटे को हराने के आराप में बीएसपी से निलम्बित किया जा चुका है।

अपने अगले ट्वीट में बसपा प्रमुख ने कहा है- सपा अगर इन निलम्बित विधायकों के प्रति थोड़ी भी ईमानदार होती तो अब तक इन्हें अधर में नहीं रखती, क्योंकि इनको यह मालूम है कि बीएसपी के यदि इन विधायकों को लिया तो सपा में बगावत व फूट पड़ेगी, जो बीएसपी में आने को आतुर बैठे हैं।

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उन्होंने आगे कहा- ”जगजाहिर तौर पर सपा का चाल, चरित्र व चेहरा हमेशा ही दलित-विरोधी रहा है, जिसमें थोड़ा भी सुधार के लिए वह कतई तैयार नहीं। इसी कारण सपा सरकार में बीएसपी सरकार के जनहित के कामों को बन्द किया व खासकर भदोई को नया संत रविदास नगर जिला बनाने को भी बदल डाला, जो अति-निन्दनीय।”

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”वैसे बीएसपी के निलंबित विधायकों से मिलने का मीडिया में प्रचारित करने के लिए कल किया गया सपा का यह नया नाटक यूपी में पंचायत चुनाव के बाद अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख के चुनाव के लिए की गई पैंतरेबाजी ज़्यादा लगती है।”

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