बस वाली राजनीति में मायावती की एंट्री

न्‍यूज डेस्‍क

उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों के मुद्दे पर सियासत जारी है। बीते दो दिनों से यूपी में प्रवासी मजदूरों को बस से घर भेजने के नाम पर राजनीति हो रही है। प्रियंका गांधी ने यूपी सरकार को 1000 बसें देने का प्रस्ताव रखा, जिसे बाद में सरकार ने स्वीकार कर लिया। उसके बाद बस पर राजनीति शुरू हो गई और आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला चल पड़ा। मजदूरों की घर वापसी के लिए बस पर हो रही राजनीति के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने बीजेपीऔर कांग्रेस दोनों को आड़े हाथों लिया है।

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बुधवार को कई ट्वीट कर मायावती ने मजदूरों को घर भेजने के नाम पर बीजेपी और कांग्रेस पर घिनौनी राजनीति का आरोप लगाया है। साथ ही मायावती ने कांग्रेस के नीयत पर भी सवाल खड़ा किया है और कहा कि अगर इनको बस से ही मदद करनी है तो पहले कांग्रेस शासित राज्यों में मदद करनी चाहिए।

बुधवार को बसपा प्रमुख मायावती ने सिलसिलेवार कई ट्वीट करते हुए शक जताया कि कहीं बीजेपी और कांग्रेस आपसी मिलीभगत के जरिए तो यह राजनीति नहीं कर रहीं, ताकि कोरोना त्रासदी के मुद्दे से ध्यान भटकाया जा सके।

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उन्होंने ट्वीट किया, ‘पिछले कई दिनों से प्रवासी श्रमिकों को घर भेजने के नाम पर खासकर बीजेपी व कांग्रेस द्वारा जिस प्रकार से घिनौनी राजनीति की जा रही है यह अति-दुर्भाग्यपूर्ण। कहीं ऐसा तो नहीं ये पार्टियां आपसी मिलीभगत से एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करके इनकी त्रासदी पर से ध्यान बांट रही हैं?’

उन्होंने आगे लिखा, ‘यदि ऐसा नहीं है तो बी.एस.पी. का कहना है कि कांग्रेस को श्रमिक प्रवासियों को बसों से ही घर भेजने में मदद करने पर अड़ने की बजाए, इनका टिकट लेकर ट्रेनों से ही इन्हें इनके घर भेजने में इनकी मदद करनी चाहिये तो यह ज्यादा उचित व सही होगा।

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जबकि इन्हीं सब बातों को खास ध्यान में रखकर ही बीएसपी के लोगों ने अपने सामर्थ्य के हिसाब से प्रचार व प्रसार के चक्कर में ना पड़कर बल्कि पूरे देश में इनकी हर स्तर पर काफी मदद की है अर्थात् बीजेपी व कांग्रेस पार्टी की तरह इनकी मदद की आड़ में कोई घिनौनी राजनीति नहीं की है।’

बसपा सुप्रीमो ने फिर कहा, ‘ बीएसपी की कांग्रेस पार्टी को यह भी सलाह है कि यदि कांग्रेस को श्रमिक प्रवासियों को बसों से ही उनके घर वापसी में मदद करनी है अर्थात ट्रेनों से नहीं करनी है तो फिर इनको अपनी ये सभी बसें कांग्रेस-शासित राज्यों में श्रमिकों की मदद में लगा देनी चाहिये तो यह बेहतर होगा।’

दूसरी ओर कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार श्रमिकों को उनके गंतव्यों तक भेजने के लिए उसकी ओर से मुहैया कराई जा रही बसों को लेकर घटिया राजनीति कर रही है। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने यह भी कहा कि ये बसें बुधवार शाम पांच बजे तक राजस्थान से लगी उत्तर प्रदेश सीमा पर खड़ी रहेंगी और उत्तर प्रदेश सरकार को इन्हें जाने की अनुमति देनी चाहिए।

उन्होंने वीडियो लिंक के माध्यम से संवाददाताओं से कहा कि यह घटिया राजनीति की चरम सीमा है। अजय सिंह बिष्ट सरकार (योगी आदित्यनाथ सरकार) गोल-गोल घूमा रही है। इस राजनीति का औचित्य क्या है? हम सरकार के इस रुख की कड़ी निंदा करते हैं। सिंघवी के मुताबिक मई के अंत की चिलचिलाती गर्मी के बीच और पैर में छाले लेकर श्रमिक चल रहे हैं, लेकिन बसों को रोका जा रहा है और सस्ती राजनीति की जा रही है।

उन्होंने कहा कि प्रियंका गांधी ने खुद कहा है कि अगर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री चाहें तो बसों पर भाजपा के अपने बैनर-झंडे लगा लें, लेकिन बसों को जाने की अनुमति दें। अभी समय है। हमारी बसें आज चार बजे तक वहां रहेंगी। अगर अजय सिंह बिष्ट जी को जनादेश और जनता की चिंता है तो तुरंत बसों को चलाने की अनुमति दीजिए।

गौरतलब है कि बसों को लेकर पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप चल रहा है। दोनों तरफ से एक दूसरे को कई पत्र लिखे गए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि कांग्रेस ने 1000 से अधिक बसों का जो विवरण मुहैया कराया उनमें कुछ दोपहिया वाहन, एंबुलेस और कार के नंबर भी हैं। इस पर कांग्रेस ने कहा कि उसकी ओर से मुहैया कराई गई सूची में उत्तर प्रदेश सरकार ने खुद 879 बसों के सही होने की पुष्टि की है और उसे अब इन बसों को चलाने की अनुमति प्रदान करनी चाहिए।

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