भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता अंतिम चरण में, सिर्फ 1% काम बाकी; जल्द हो सकती है बड़ी ट्रेड डील

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Deal) की बातचीत अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा किया है कि प्रस्तावित समझौते का केवल 1 फीसदी हिस्सा ही अंतिम रूप दिए जाने के लिए बचा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में दोनों देशों के बीच इस महत्वपूर्ण व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं।

शुक्रवार को IIT-दिल्ली में आयोजित ‘यूएस-इंडिया ट्रस्ट इनिशिएटिव: एडवांसिंग पार्टनरशिप इन रिसर्च एंड इनोवेशन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत और अमेरिका को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), फार्मास्यूटिकल्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि व्यापार समझौता दोनों देशों की आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा और निवेश के नए अवसर पैदा करेगा।

भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 1 से 4 जून के बीच नई दिल्ली पहुंचेगा। वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, यह दौरा अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इससे पहले भारतीय वार्ताकारों की टीम 20 से 23 अप्रैल के दौरान वॉशिंगटन गई थी, जहां समझौते से जुड़े अंतिम मुद्दों पर चर्चा हुई थी।

सर्जियो गोर ने कहा, “भारत ने व्यापार समझौते के अंतिम 1 फीसदी हिस्से को पूरा करने के लिए अपनी टीम वॉशिंगटन भेजी थी। अगले सप्ताह अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आएगा और बातचीत को आगे बढ़ाएगा। हमें उम्मीद है कि आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में यह समझौता संपन्न हो जाएगा।”

उनके अनुसार, यह समझौता दोनों देशों की आर्थिक समृद्धि और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

अमेरिकी राजदूत ने बताया कि पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। यह दोनों देशों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग और मजबूत होते व्यापारिक रिश्तों का संकेत है।

सर्जियो गोर के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का उद्देश्य ऐसा व्यापारिक वातावरण तैयार करना है जिससे अमेरिकी कंपनियों और कर्मचारियों को अधिक अवसर मिल सकें। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदारों में से एक है।

गौरतलब है कि 7 फरवरी को भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरिम व्यापार समझौते के लिए एक रूपरेखा पर सहमति जताई थी। दोनों देशों ने व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता भी दोहराई थी।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिका इस व्यापार समझौते को जल्द से जल्द अंतिम रूप देना चाहता है। इसके पीछे नवंबर में होने वाले अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव एक बड़ा कारण माने जा रहे हैं। ट्रंप प्रशासन चुनावों से पहले एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि दिखाना चाहता है।

हालांकि भारत सरकार कृषि और घरेलू उद्योगों के हितों को ध्यान में रखते हुए सतर्क रुख अपनाए हुए है। विशेष रूप से कृषि क्षेत्र को और अधिक खोलने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भारत सावधानी से आगे बढ़ रहा है।

जानकारों के मुताबिक, हाल ही में अमेरिका और चीन के बीच कोई बड़ा आर्थिक समझौता नहीं हो सका। ऐसे में भारत के साथ व्यापार समझौते को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ गया है।

सूत्रों का कहना है कि चीन ने अमेरिकी कृषि उत्पादों, खासकर सोयाबीन की खरीद बढ़ाने को लेकर कोई सकारात्मक संकेत नहीं दिया है, जिससे अमेरिका वैकल्पिक आर्थिक साझेदारियों पर अधिक ध्यान दे रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच चल रही वार्ता में कई महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं, जिनमें—

  • मार्केट एक्सेस (Market Access)
  • गैर-शुल्क बाधाएं (Non-Tariff Barriers)
  • सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा
  • आर्थिक एवं आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा
  • निवेश और तकनीकी सहयोग

जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। यदि आने वाले हफ्तों में यह डील पूरी हो जाती है, तो इससे दोनों देशों के व्यापार, निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है। साथ ही यह समझौता वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में भारत की भूमिका को और मजबूत करने वाला साबित हो सकता है।

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