Thursday - 12 February 2026 - 6:14 PM

किम जोंग उन ने अपना उत्तराधिकारी का किया एलान? NIS की ब्रीफिंग से बढ़ीं अटकलें

जुबिली न्यूज डेस्क

दक्षिण कोरिया की खुफिया एजेंसी नेशनल इंटेलिजेंस सर्विस (NIS) ने संसद सदस्यों को बंद कमरे में दी गई ब्रीफिंग में बताया कि किम जोंग उन की बेटी किम जू ए अब ‘उत्तराधिकारी नियुक्ति’ के चरण में पहुंच चुकी हैं।

पहले एजेंसी उन्हें ‘उत्तराधिकारी प्रशिक्षण’ में मान रही थी, लेकिन अब आकलन बदला गया है। इससे संकेत मिलता है कि उत्तर कोरिया में किम परिवार की चौथी पीढ़ी तक सत्ता हस्तांतरण की तैयारी शुरू हो चुकी है।

कौन हैं किम जू ए?

किम जू ए के बारे में सार्वजनिक जानकारी बेहद सीमित है।

  • अनुमानित जन्म वर्ष: 2013

  • उम्र: करीब 13 साल

  • पहली सार्वजनिक मौजूदगी: नवंबर 2022, लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण के दौरान

इसके बाद से वे कई अहम कार्यक्रमों में पिता के साथ नजर आई हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • हथियार परीक्षण

  • सैन्य परेड

  • फैक्ट्री उद्घाटन

  • कोरियाई पीपुल्स आर्मी स्थापना दिवस समारोह

जनवरी 2026 में उन्होंने कुमसुसन सन पैलेस का दौरा किया, जिसे उत्तराधिकार के लिहाज से अहम संकेत माना जाता है।
सितंबर 2025 में वे पहली बार विदेश यात्रा पर बीजिंग गईं और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की।

उत्तराधिकारी मानने के पीछे क्या तर्क?

NIS के मुताबिक, निम्न संकेतों के आधार पर आकलन बदला गया है:

  • सार्वजनिक कार्यक्रमों में लगातार उपस्थिति

  • सैन्य आयोजनों में भागीदारी

  • प्रतीकात्मक स्थलों का दौरा

  • नीतिगत मामलों पर संभावित भूमिका

एजेंसी अब इस पर नजर रखे हुए है कि आगामी वर्कर्स पार्टी कांग्रेस में उन्हें कोई आधिकारिक पद मिलता है या नहीं।

9वीं पार्टी कांग्रेस पर टिकी निगाहें

उत्तर कोरिया इस महीने के अंत में अपनी 9वीं वर्कर्स पार्टी कांग्रेस आयोजित करने जा रहा है।
यह सम्मेलन हर पांच साल में होता है और देश की प्रमुख नीतियां तय की जाती हैं—

  • अर्थव्यवस्था

  • विदेश नीति

  • रक्षा रणनीति

संभावना है कि यह आयोजन 16 फरवरी (किम जोंग इल का जन्मदिन) या चंद्र नववर्ष के बाद हो सकता है।

किम परिवार की चौथी पीढ़ी की तैयारी?

उत्तर कोरिया में सत्ता हमेशा किम परिवार के पास रही है:

  • किम इल सुंग

  • किम जोंग इल

  • किम जोंग उन

अब किम जू ए के साथ चौथी पीढ़ी का दौर शुरू होने की अटकलें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सत्ता की स्थिरता और निरंतरता का संदेश देने की रणनीति हो सकता है। हालांकि, उत्तर कोरिया की बंद व्यवस्था के कारण आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।प्योंगयांग की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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