लोकसभा में यू-टर्न? राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार नोटिस नहीं लाएगी सरकार

जुबिली स्पेशल डेस्क

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया भाषण को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच अब यह स्पष्ट हो गया है कि भाजपा उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन (Privilege Motion) का नोटिस नहीं लाएगी।

हालांकि, विवाद पूरी तरह थमा नहीं है। भाजपा राहुल गांधी के भाषण के कथित आपत्तिजनक हिस्सों को रिकॉर्ड से हटाने की मांग पर अब भी कायम है। पार्टी के चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने बजट चर्चा के दौरान दिए गए कुछ बयानों को कार्यवाही से हटाने (Expungement) के लिए औपचारिक नोटिस जारी किया है।

पहले भी हटाए जा चुके हैं कुछ अंश

सूत्रों के अनुसार, लोकसभा सचिवालय ने बुधवार रात राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को रिकॉर्ड से हटा दिया था। बावजूद इसके भाजपा का मानना है कि यह कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, इसलिए अलग से नोटिस दिया गया है।

हरदीप सिंह पुरी पर लगाए आरोप

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर कुछ आरोप लगाए थे। संसदीय परंपरा के मुताबिक, इन आरोपों का जवाब संबंधित मंत्री स्वयं सदन में देंगे।

निशिकांत दुबे का ‘Substantive Motion’

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी के खिलाफ एक अलग ‘Substantive Motion’ दायर किया है। यह सामान्य विशेषाधिकार नोटिस से अलग प्रक्रिया है। यदि लोकसभा अध्यक्ष इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो इस पर सदन में चर्चा और मतदान हो सकता है। प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में राहुल गांधी की सदस्यता पर भी असर पड़ सकता है।

दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने संसद के भीतर और बाहर ऐसे बयान दिए हैं, जो संस्थाओं की गरिमा और राष्ट्रीय एकता को प्रभावित करते हैं। उन्होंने 11 फरवरी के भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व सेना प्रमुख की अप्रकाशित पुस्तक का कथित रूप से गलत संदर्भ दिया गया, जिससे सेना और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचा।

पत्र में यह भी कहा गया है कि मामले की जांच के लिए संसदीय समिति गठित की जानी चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर सदस्यता समाप्त करने पर विचार किया जाए।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि राहुल गांधी के बयान कार्यवाही से हटा दिए गए, जबकि अन्य नेताओं के समान बयानों पर कार्रवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि पिछली बार भी राहुल गांधी की सदस्यता खत्म की गई थी, लेकिन जनता ने उन्हें और अधिक मतों से जिताकर वापस भेजा। वेणुगोपाल ने कहा, “हमें नोटिस से फर्क नहीं पड़ता।”

फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम पर राहुल गांधी या कांग्रेस की ओर से कोई औपचारिक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अब नजर इस बात पर है कि क्या ‘Substantive Motion’ आगे बढ़ता है और क्या यह मामला संसद के भीतर नए सियासी टकराव का कारण बनेगा।

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