क्या ताली बजाने से कोरोना का संक्रमण नष्ट होता है?

न्यूज डेस्क

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बीते दिनों देशवासियों को संबोधित करते हुए 22 मार्च को जनता कर्फ्यू  का ऐलान किया था और साथ में लोगों से अपील की थी कि घर-घर दूध, अखबार, राशन पहुंचाने वालों, पुलिसकर्मी, स्वास्थ्य कर्मी और पत्रकारों का आभार जताने के लिए 22 मार्च की ही शाम 5 बजे शंख, ताली, घंटा-थाली बजाएं। इसके बाद से सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाह उड़ाई जा रही है कि एक साथ ताली बजाने से उत्पन्न होने कंपन से कोरोना वायरस का संक्रमण नष्ट हो जाएगा।

ऐसी अफवाह पढ़े-लिखे लोग भी उड़ा रहे हैं। बीजेपी की ही एक महिला नेता ने अपने ट्विटर अकाउंट से ऐसा ही लिखा था। हालांकि बाद में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया।

फिलहाल पीआईबी फैक्ट चेक ने इस तरह की अफवाह की जांच की तो पाया कि एक साथ ताली बजाने से उत्पन्न कंपन से कोरोना वायरस संक्रमण नष्ट नहीं होता है।

उन्होंने बताया कि जनता कर्फ्यू के दौरान शाम पांच बजे ताली बजाने की पहन उन लोगों के प्रति आभार व्यक्त करना है जो निस्वार्थ भाव से कोविड-19 से मुकाबला कर रहे हैं।

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इससे पहले सोशल मीडिया पर चिकन-मटन खाने से कोरोना फैलता है, की भी अफवाह उड़ाई गई थी। इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिकों और डॉक्टरों ने कहा कि इससे कोरोना नहीं फैलता, बावजूद इसके लोगों ने मटन-चिकन से दूरी बना ली है।

सोशल मीडिया पर कई ऐसे पोस्ट सामने आए हैं, जिनमें दावा किया गया है कि बकरे के मीट में कोरोना वायरस पाया गया है। अंडा, चिकन और मछली खाने से कोरोना वायरस फैलता है। मगर पीआईबी ने अपने फैक्ट चेक में पाया है कि मटन खाने से कोरोना वायरस नहीं फैलता है। पीआईबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि मच्छरों के काटने से भी कोरोना वायरस नहीं फैलता है।

पीआईबी ने कोरोना वायरस पर कुछ सही जानकारी साझा किया है, जिसे हम सबको समझने की जरूरत है। ताकि कोरोना वायरस पर पैनिक होने की बजाय हम इसके सही बचाव पर ध्यान देकर इससे संक्रमित होने से बच सकते हैं।

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