दलित डिग्निटी एंड जस्टिस सेंटर का खुलासा, 3 साल के 254 SC/ST केसों की रिपोर्ट, 62 में चार्जशीट नहीं

जुबिली स्पेशल डेस्क

उरई (जालौन). जिले में अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 के तहत दर्ज एफआईआर की चार्जशीट समय से कोर्ट में जमा न होने के मुद्दे पर दलित डिग्निटी एंड जस्टिस सेंटर (DDJC) सक्रिय हो गया है।

संगठन के प्रतिनिधि मंडल ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जालौन डॉ. दुर्गेश कुमार से मुलाकात कर 62 लंबित मामलों की सूची सहित एक मांगपत्र सौंपा।

दलित डिग्निटी एंड जस्टिस सेंटर के संस्थापक – एड. कुलदीप कुमार बौद्ध ने बताया की न्याय तक पहुँच अभियान टीम जहाँ एक ओर समुदाय को क़ानून के प्रति जागरूक करने का काम कर रही है वही विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन का रिसर्च व अध्ययन भी कर रही है जिसके क्रम में अभी एस.सी./एस.टी एक्ट पर रिसर्च की गई जिसकी फाइंडिंग को साझा किया गया ताकि एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन हो, इसको लेकर आगे और विस्तृत अध्ययन, रिसर्च रिपोर्ट व साक्ष्य के आधार पर अलग अलग स्तर पर पैरवी की जायेगी, और प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान पूर्ण न्याय दिलाने का प्रयास किया जायेगा

3 सालों के 254 मामलों का विस्तृत अध्ययन

DDJC टीम ने जालौन जिले में पिछले तीन वर्षों में दर्ज 254 SC/ST एक्ट के मामलों का अध्ययन किया। रिपोर्ट के अनुसार

  • 168 मामलों में चार्जशीट दाखिल
  • 24 मामलों में फाइनल रिपोर्ट (FR)
  • 62 मामले बिना FR और बिना चार्जशीट के लंबित,
  • जिनका ई-कोर्ट्स पोर्टल पर भी कोई स्टेटस उपलब्ध नहीं है।

SC/ST एक्ट के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक केस की चार्जशीट 60 से 90 दिनों के भीतर कोर्ट में दाखिल होनी चाहिए। लेकिन रिपोर्ट में सामने आया कि कुछ मामलों में 1000 दिन से भी अधिक समय बीत चुका है।

DDJC प्रतिनिधि मंडल में

एड. कुलदीप कुमार बौद्ध (एडवोकेट—हाई कोर्ट), एड. रश्मि वर्मा, एड. निकहत परवीन, एड. कासिम खान, प्रदीप कुमार, सचिन कुमार, आयुष कुमार आदि शामिल थे। टीम ने लंबित मामलों में तत्काल और प्रभावी कार्यवाही की मांग की, जिस पर एसपी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।

न्याय तक पहुँच अभियान ग्रामीण स्तर पर उठाया कदम

DDJC द्वारा जिले में ‘न्याय तक पहुँच अभियान (Access to Justice Campaign)’ चलाया जा रहा है। इसके तहत गांव/पंचायत स्तर पर पैरालीगल चैम्पियन वॉलंटियर्स तैयार किए जा रहे हैं,

समुदाय को कानून की जानकारी 

  • SC/ST एक्ट, महिला हिंसा, पॉक्सो आदि मामलों पर जागरूकता,
  • गंभीर घटनाओं की फैक्ट फाइंडिंग और दस्तावेजीकरण,
  • पीड़ितों को सम्मानजनक न्याय दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

आगे और विस्तृत रिसर्च की तैयारी

DDJC संस्थापक एड. कुलदीप कुमार बौद्ध ने बताया कि संगठन की टीम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर लगातार रिसर्च कर रही है। SC/ST एक्ट पर की गई हालिया स्टडी की फाइंडिंग साझा की गई है, ताकि एक्ट के प्रावधानों का जमीनी स्तर पर सही पालन हो सके। उन्होंने बताया कि आगे और विस्तृत शोध रिपोर्ट तैयार कर विभिन्न स्तरों पर पैरवी की जाएगी।

Related Articles

Back to top button