‘भारत में सरकार के निशाने पर आलोचक, कार्यकर्ता और पत्रकार’

जुबिली न्यूज डेस्क

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच ने भारत सरकार के बारे में बड़ी बात कही है। ह्यूमन राइट्स वॉच ने कहा है कि भारत सरकार के अधिकारी पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और सरकार के आलोचकों को चुप कराने के लिए कर चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

सितंबर माह में सरकारी वित्तीय अधिकारियों ने दिल्ली, श्रीनगर और मुंबई में कई जगहों पर छापेमारी की, जिसमें पत्रकार, एक अभिनेता और एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के घर और कार्यालय पर छापेमारी शामिल है।

ह्यूमन राइट्स वॉच का यह भी कहना है कि छापेमारी की ये कार्रवाई राजनीति से प्रेरित हैं। ये छापेमारी भी केंद्र में भाजपा की सरकार आने के बाद से अभिव्यक्ति की आजादी, शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर की जा रही कार्यवाही का ही एक हिस्सा है।

संस्था ने कहा है, “इस क्रम में राजनीति से प्रेरित कई आपराधिक मामले भी शामिल हैं जिसमें कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, शिक्षाविदों, छात्रों और अन्य के खिलाफ राजद्रोह तक का मुकदमा दर्ज किया गया है। आलोचकों और मुखर समूहों को निशाना बनाने के लिए विदेशी फंडिंग नियमों और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों का भी इस्तेमाल किया गया है।”

इस मामले में ह्यूमन राइट्स वॉच की दक्षिण एशिया निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, “भारत सरकार की छापेमारी आलोचकों को परेशान करने और डराने-धमकाने के इरादे से की गई लगती है। यह आलोचकों को चुप कराने की कोशिश के एक पैटर्न को दर्शाती है।”

गांगुली कहती हैं “ये भारत के मूल लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर करती हैं और मौलिक स्वतंत्रता को भी।”

इसके अलावा एडिटर्स गिल्ड और प्रेस क्लब ऑफ इंडिया जैसे पत्रकार संगठन भी कई बार मीडिया की स्वतंत्रता पर हमले ना करने का आह्वान कर चुके हैं। पत्रकार संगठनों ने कई बार कहा है कि यह प्रेस की स्वतंत्रता पर एक खुला हमला है।

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हर्ष मंदर.

सबसे हालिया घटना में 16 सितंबर को प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों ने वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दिल्ली में एक कार्यकर्ता हर्ष मंदर के घर और कार्यालय पर छापेमारी की।

छापेमारी के समय हर्ष मंदर एक फेलोशिप के लिए जर्मनी में थे। कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों और पूर्व सिविल सेवकों ने छापे की निंदा की है।

इससे पूर्व 16 सितंबर को अभिनेता सोनू सूद से जुड़े मुंबई के परिसर और कुछ अन्य जगहों पर इनकम टैक्स के अधिकारी पहुंचे थे।

एक न्यूज एजेंसी ने अधिकारियों के हवाले से बताया था कि आयकर विभाग ‘एक रियल एस्टेट सौदे की जांच कर रहा है।’

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इससे पूर्व 8 सितंबर को जम्मू और कश्मीर में पुलिस ने चार कश्मीरी पत्रकारों – हिलाल मीर, शाह अब्बास, शौकत मोट्टा और अजहर कादरी के घरों पर छापा मारा था और उनके फोन और लैपटॉप जब्त कर लिए थे।

10 सितंबर को आयकर विभाग ने कथित कर चोरी की जांच के तहत न्यूजलॉन्ड्री और न्यूजक्लिक के कार्यालयों पर छापा मारा था।

मानवाधिकारों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त और विभिन्न संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञों ने पिछले कुछ सालों में नागरिकों के कम होते अधिकार क्षेत्र और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, आलोचकों के बढ़ते उत्पीडऩ पर चिंता जाहिर की है।

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