‘रामायण विश्वमहाकोश’ के प्रथम संस्करण का विमोचन करेंगे CM योगी

जुबिली न्यूज़ डेस्क

लखनऊ। भारतीय संस्कृति और दुनिया भर के राम भक्तों को योगी सरकार गौरव का एक और ऐतिहासिक अवसर देने जा रही है। रामायण विश्वमहाकोश का प्रथम संस्करण प्रकाशन के लिए तैयार हो गया है। जानकी नवमी के अवसर पर शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऐतिहासिक संस्करण का विमोचन करेंगे।

यूपी की राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्तिथ संगीत नाटक अकादमी परिसर में संत गाडगे प्रेक्षागृह में आयोजित होने जा रहे विमोचन कार्यक्रम में विदेश मंत्रालय के अपर सचिव डा. अखिलेख मिश्र समेत देश और दुनिया के कई विद्वान भी मौजूद रहेंगे।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष निर्देश पर अयोध्या शोध संस्थान द्वारा तैयार किया जा रहा रामायण विश्वमहाकोश का संस्करण ई-बुक के रूप में भी लांच किया जाएगा। रामायण विश्व महाकोश के पहले संस्करण का अंग्रेजी भाषा में विमोचन किया जाएगा। एक महीने बाद हिन्दी और तमिल भाषा में प्रथम संस्करण को प्रकाशित किया जाएगा।

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उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग- विदेश मंत्रालय के सहयोग से दुनिया के 205 देशों से रामायण की मूर्त व अमूर्त विरासत संजोकर रामायण विश्वमहाकोश परियोजना को साकार करने में जुटा है। इसके लिए विभाग की ओर से रामायण विश्वमहाकोश कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला में पश्चिम बंगाल, असम, केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, त्रिपुरा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और दिल्ली देश के कई राज्यों से 70 विद्वान शामिल हैं।

रामायण विश्वमहाकोश को 200 खंडों में प्रकाशित करने की योजना है। इसके लिए अयोध्या शोध संस्थान ने देश और दुनिया भर में संपादक मंडल और सलाहकार मंडल का गठन किया है। रामायण विश्वमहाकोश के प्रथम संस्करण का डिजाइन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर ने तैयार किया है।

रामायण विश्वमहाकोश के पहले संस्करण के साथ उड़िया, मलयालम, उर्दू और असमिया भाषा में भी रामायण के प्रकाशन का विमोचन किया जायेगा। अयोध्या के बारे में सबसे पुरानी और प्रमाणिक पुस्तक ‘अयोध्या महात्म’ को वैश्विक स्तर पर विस्तारित करने के लिए इसे अंग्रेजी भाषा में विमोचित किया जायेगा।

इस मौके पर कार्यशाला में रामायण विश्वमहाकोश के चित्रों की प्रदर्शनी भी लगायी गयी है। इसमें प्रमुख चित्रों को संजोया गया है। इस अवसर पर ‘रामायण की नारी’ पर आधारित सीनियर एवं जूनियर वर्ग की छात्राओं द्वारा चित्र प्रदर्शनी भी लगाई।

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 30 मई, 2018 को अयोध्या शोध संस्थान, अयोध्या की समीक्षा बैठक में विश्व के समस्त रामायण स्थलों का सर्वेक्षण एवं प्रकाशन कराए जाने के निर्देश दिए थे। संस्कृति विभाग ने इस पर अमल करते हुए पहले संस्करण को साकार रूप दे दिया है।

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