सोशल मीडिया पर उठी अवाज- संविधान बदल दो मोदी जी

जुबिली न्यूज़ डेस्क

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को 70वें संविधान दिवस के मौके पर संसद भवन के केंद्रीय कक्ष से वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए डिजिटल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। संविधान दिवस पर आयोजित इस समारोह में उपराष्ट्रपति एम। वेंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के अलावा अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में प्रधानमंत्री मोदी ने एक कार्यक्रम को संबोधित किया। पीएम मोदी अपने ट्विटर पर मिलने वाली मित्र देशों के प्रमुखों की बधाई पर धन्यवाद ज्ञापित कर रहे हैं लेकिन ट्विटर पर ही सबसे ऊपर जो शब्द ट्रेंड कर रहा है वो है #संविधान_बदल_दो_मोदी_जी।

गौरतलब है कि बदलते दौर में सोशल मीडिया का महत्व बढ़ गया है। आज सोशल मीडिया का प्रभाव इतना है कि मीडिया पर खबर आने के बाद किसी मामले में कार्रवाई होने पर देरी हो सकती है लेकिन मामला सोशल मीडिया पर चर्चित हो जाए तो आनन-फानन में कार्रवाई होती है।

ऐसे में ट्विटर पर संविधान बदलने की मांग उठना और सबसे ऊपर इसका ट्रेंड करना कई सवाल खड़े करता है। आखिर ये लोग कौन हैं जो संविधान दिवस के दिन ऐसी मांग उठा रहे हैं ? इनकी मंशा क्या है ? क्या आरक्षण को लेकर जल्दी ही कोई बड़ा फैसला होने वाला है या फिर ये महज एक खुराफात है। फिलहाल इन सवालों के जवाब जब मिलेंगे तब मिलेंगे लेकिन ऐसी मुहीम पर गंभीरता से सोचने की जरुरत है।

गृह मंत्रालय को सोशल मीडिया को लेकर सावधान रहने की भी जरुरत है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह सोशल मीडिया ने अपनी पहुंच लोगों तक बनाई है उसके बाद यह भी ध्यान देने की आवश्यकता है कि कहीं कोई ऐसी घटना न घटित होने पाए जिससे देश किसी मुसीबत में पड़ जाए।

बता दें कि संविधान दिवस हर साल 26 नवंबर को मनाया जाता है, जिस दिन भारत के संविधान मसौदे को अपनाया गया था। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू होने से पहले 26 नवंबर 1949 को इसे अपनाया गया था। संविधान सभा के सदस्यों का पहला सेशन 9 दिसंबर 1947 को आयोजित हुआ। इसमें संविधान सभा के 207 सदस्य थे। संविधान की ड्रॉफ्टिंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ बी आर अंबेडकर थे। इन्हें भारत के संविधान का निर्माता भी कहा जाता है।

यह भी पढ़ें : इकाना पर होगा पहली बार टेस्ट क्रिकेट, BCCI की होगी नजर

यह भी पढ़ें : ई.. का..अब अमिताभ किसान सम्मान निधि सूची मा?

यह भी पढ़ें : महाराष्ट्र सियासी ड्रामा : कहीं चाणक्य से चूक तो नहीं हो गई ?

Related Articles

Back to top button