प्रांशु मिश्रा डॉ पायल की मौत कई मामलों में रोहित वेमूला की मौत याद दिलाती है। बस अंतर यह कि वहां जाति के नाम पर संस्थागत भेदभाव था। पायल की मौत के जिम्मेदार उसके ही कुछ सहपाठी डॉक्टर थे। कुछ ऐसे डॉक्टर जो जाहिर तौर पर खासे पढ़े लिखें होंगे। …
Read More »जुबिली डिबेट
कांग्रेस की डूबती नैया को आखिर कौन लगाएगा पार
कृष्णमोहन झा हाल ही में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के परिणामों ने यूं तो सारे विरोधी दलों को हताशा की स्थिति में पंहुचा दिया है,लेकिन इस चुनाव में कांग्रेस को जो सदमा लगा है ,उससे उभरने में पार्टी को कितना समय लगेगा, यह कोई नहीं बता सकता। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल …
Read More »सुनामी में घास: चुनावी गणित में प्रबंधन बनाम प्रशासन
डा. श्रीश पाठक भारतीय जनता पार्टी की इतनी शानदार जीत ऐतिहासिक है, यहाँ से भारतीय आम चुनाव एक नए विमर्श प्रतिमानों के साथ याद किये जायेंगे l इस जीत के लिए इन्हीं आंकड़ों के साथ कोई आश्वस्त था, यह कहना निरी मुर्खता होगी और कुछ सरलीकरण भी चुनाव पश्चात् प्रचलित …
Read More »कभी गलत नही होता लोगों का सामूहिक फैसला
केपी सिंह राजनीति का एक सूत्र वाक्य है जनता कभी गलत नही होती। व्यक्तिगत तौर पर लोग गलत और मूल्यहीन हो सकते हैं लेकिन लोगों का सामूहिक विवेक और निर्णय मूल्य पक्षधरता को व्यक्त करता है। चार्वाकवादी युग निश्चित रूप से चार्वाकवादी इस युग में मौलिक आध्यात्मिक भावनाएं लोगों के …
Read More »चुनावी समाजशास्त्र समझने में नाकाम रहा गठबंधन का गणित
डॉ. मनीष पाण्डेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की जीत अप्रत्याशित बिल्कुल भी नहीं है। 2004 और पुनः 2009 में यूपीए की बढ़ी हुई सीटों के साथ सरकार बनाने लायक जीत जैसा परिदृश्य ही 2014 और पुनः बढ़ी हुई सीटों के साथ 2019 में एनडीए के पक्ष में …
Read More »नरेन्द्र मोदी का यह गुण सीख ले विपक्ष
शबाहत हुसैन विजेता महात्मा गांधी के क़ातिल को महात्मा बताने वाली साध्वी प्रज्ञा की भोपाल से जीत पर एक विद्वान ने कहा कि गांधी जी को 1948 में सिर्फ गोली मारी गई थी। लेकिन उनकी मौत 2019 में हुई है। यह किसी एक शख्स का दर्द नहीं लाखों करोड़ों लोगों …
Read More »बहुआयामी सोच के कारण हुई मोदी की वापसी
डा. रवीन्द्र अरजरिया विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र में लोकप्रियता की परिभाषायें बदलने लगीं हैं। जातिवाद, क्षेत्रवाद, भाषावाद, वंशवाद, वर्गवाद जैसी मानसिकता ने अस्तत्वहीनता की ओर कदम बढाना शुरू कर दिया है। संकुचित दायरे में कैद रहने वाली विचारधारा ने अब अपनी आजादी का रास्ता खोज लिया है। राष्ट्रवादी सोच …
Read More »देश में फिर मोदी राज ऐसे हुआ संभव
पंकज प्रसून 1-कांग्रेस आम आदमी से जुड़े मुद्दों को ठीक तरह से उठा नही पाई। राफेल इतना टेक्निकल मुद्दा है कि जनता की समझ में ठीक से आ नही आया। इस बार चुनाव में पहली बार ऐसा लग रहा की महंगाई कोई मुद्दा ही नही है। जबकि गैस सिलेंडर महंगा …
Read More »कोटी कोटी जनता के हृदय सम्राट बने मोदी
के एम झा सत्रहवीं लोकसभा के चुनाव परिणाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुनामी के साथ घोषित हो गया। भाजपा नीत राजग ने जिस तरह से इस चुनाव में प्रदर्शन किया है उससे यह साबित हो गया है कि अब देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कद का कोई नेता …
Read More »अगर एग्ज़िट पोल सही साबित हुए तो ……
हेमंत तिवारी एग्जिट पोल के नतीजे हमारे सामने हैं और अगर इन्हे सच का एक संकेत माना जाए तो सपा बसपा की नींद उड़ाने के लिए ये काफी हैं। देश के कई टीवी चैनलों ने अपने अनुमानों में यूपी में भाजपा को 50 से ज्यादा सीटें दी हैं। अगर ऐसे ही नतीजे …
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