तख्तापलट के बाद बांग्लादेश में हुए पहले आम चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं। इन चुनावों में Bangladesh Nationalist Party (बीएनपी) ने प्रचंड बहुमत हासिल किया है। पार्टी प्रमुख खालिदा जिया के नेतृत्व वाली बीएनपी की जीत के बाद उनके बेटे तारिक रहमान के सत्ता संभालने की राह लगभग साफ मानी जा रही है।
संसदीय चुनाव के साथ कराए गए जनमत संग्रह में भी बड़ा फैसला सामने आया है। करीब 65 प्रतिशत मतदाताओं ने ‘जुलाई चार्टर’ के समर्थन में मतदान किया है। माना जा रहा है कि इस जनादेश के बाद देश की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
यूनुस के एजेंडे को जनता की मंजूरी
‘जुलाई चार्टर’ को मोहम्मद यूनुस की प्रमुख पहल माना जा रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने मतदाताओं से इस चार्टर के समर्थन में वोट देने की अपील की थी। उनका दावा था कि इससे शासन व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी, राजनीतिक सुधार होंगे और आम जनता को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।
13 फरवरी को हुई वोटिंग में लगभग 27 लाख लोगों ने चार्टर के पक्ष में मतदान किया, जबकि बेहद कम मत इसके विरोध में पड़े। इसे यूनुस की सोच पर जनता की मुहर के रूप में देखा जा रहा है।
जुलाई चार्टर में क्या प्रस्तावित है?
जुलाई चार्टर में कुल 84 सुधारों का प्रस्ताव शामिल है। इनमें प्रमुख रूप से—
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भारत की तर्ज पर द्विसदनीय संसद (उच्च सदन की स्थापना)
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चुनावी सुधार और राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र
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सिविल सोसाइटी को मजबूत करने के उपाय
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सुधार आयोग का गठन
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प्रधानमंत्री के बजाय राष्ट्रपति को अधिक शक्तियां
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किसी व्यक्ति के दो बार से अधिक प्रधानमंत्री बनने पर रोक
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राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना
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निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव व्यवस्था
जनमत संग्रह में मंजूरी मिलने के बाद अब आने वाली सरकार के लिए दो वर्षों के भीतर इन सुधारों को लागू करना अनिवार्य माना जा रहा है।
बांग्लादेश में जनमत संग्रह का इतिहास
साल 2026 के इस जनमत संग्रह को मिलाकर बांग्लादेश में अब तक चार बार रेफरेंडम कराए जा चुके हैं।
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15 सितंबर 1991 – संविधान संशोधन विधेयक को राष्ट्रपति की स्वीकृति देने के सवाल पर 84.38% लोगों ने समर्थन किया था।
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21 मार्च 1985 – तत्कालीन राष्ट्रपति लेफ्टिनेंट जनरल हुसैन मुहम्मद इरशाद की नीतियों पर भरोसे को लेकर जनमत संग्रह हुआ, जिसमें करीब 94% मत समर्थन में पड़े।
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30 मई 1977 – राष्ट्रपति मेजर जनरल जियाउर रहमान की नीतियों के समर्थन में 98.88% लोगों ने ‘हां’ कहा था।
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2026 – ‘जुलाई चार्टर’ के जरिए व्यापक संवैधानिक और राजनीतिक सुधारों को लेकर जनता ने समर्थन जताया है।
ताजा जनादेश से साफ है कि बांग्लादेश की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ संवैधानिक ढांचे में भी बड़े बदलाव संभव हैं।
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