वृंदावन नाव हादसे के बाद घाटों पर सन्नाटा, नाविकों की रोज़ी-रोटी पर संकट

मथुरा (वृंदावन)। वृंदावन में हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद यमुना घाटों की रौनक पूरी तरह फीकी पड़ गई है। श्रद्धालुओं से भरी नाव पलटने की घटना के बाद घाटों पर भक्तों की आवाजाही में भारी कमी आई है, जिससे नाविकों और घाट से जुड़े छोटे कारोबारियों के सामने रोज़ी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

स्थानीय नाविकों का कहना है कि हादसे के बाद हालात बेहद खराब हो गए हैं। नाविकों के मुताबिक, पहले की तुलना में करीब 75 प्रतिशत तक श्रद्धालुओं की आवाजाही कम हो गई है, जिससे उनका काम लगभग ठप हो गया है।

एक नाविक ने बताया, “हादसे के बाद से बोट चलना बंद जैसा है। दिनभर घाट खाली पड़े रहते हैं। कभी-कभी तो दो वक्त की रोटी भी मुश्किल हो जाती है।”

केवल नाविक ही नहीं, बल्कि घाटों पर छोटे व्यापारियों की स्थिति भी खराब है। कंठी और अन्य धार्मिक सामान बेचने वाले दुकानदारों ने बताया कि अब पहले जैसी बिक्री नहीं हो रही। श्रद्धालुओं की कमी के कारण घाटों पर सन्नाटा पसरा हुआ है

एक दुकानदार ने कहा, “पहले घाट भक्तों से भरे रहते थे, अब लोग बहुत कम आ रहे हैं। बोनी तक नहीं हो पाती।”

गौरतलब है कि 10 अप्रैल को वृंदावन में पंजाब से आए श्रद्धालुओं से भरी नाव केशी घाट के पास पीपा पुल से टकराकर पलट गई थी। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 10 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया था।

नाव में सवार यात्री पंजाब के लुधियाना और मुक्तसर जिलों से धार्मिक यात्रा पर आए थे। हादसे के समय नाव में दो दर्जन से अधिक लोग सवार थे और किसी के पास लाइफ जैकेट नहीं थी।

इस घटना के बाद घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था और नाव संचालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोग अब प्रशासन से सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करने की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों।

फिलहाल वृंदावन के घाटों की रौनक गायब है और नाविकों के सामने सबसे बड़ा सवाल अपनी रोज़ी-रोटी बचाने का है।

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