महंगाई का नया झटका! अब नाश्ता भी हुआ महंगा

सोना-चांदी, पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतों से परेशान आम आदमी को अब महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। मुंबई में ब्रेड की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। 16 मई 2026 से कई बड़ी कंपनियों ने नई दरें लागू कर दी हैं, जिसके बाद हर तरह की ब्रेड पर करीब 5 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।

अब सुबह की चाय के साथ ब्रेड, सैंडविच या पाव खाने वालों को ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ेंगे। खासकर मुंबई जैसे शहर में, जहां लाखों लोग रोजाना वड़ा पाव, सैंडविच, भाजी पाव और अन्य ब्रेड आधारित खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहते हैं, वहां इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ने वाला है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रेड की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे कई बड़े कारण जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ी वजह ब्रेड की पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक पाउडर की कीमतों में तेजी है। यह कच्चा माल बड़े पैमाने पर आयात किया जाता है और रुपये की कमजोरी के कारण इसकी लागत काफी बढ़ गई है।

इसके अलावा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से ट्रांसपोर्टेशन खर्च भी बढ़ गया है। वहीं ब्रेड में इस्तेमाल होने वाले प्रिजर्वेटिव्स और अन्य सामग्री की लागत बढ़ने से बेकरी कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। यही वजह है कि कंपनियों ने अब इसका बोझ ग्राहकों पर डालना शुरू कर दिया है।

1. 400 ग्राम सैंडविच ब्रेड

  • पहले: ₹40
  • अब: ₹45

2. होल व्हीट ब्रेड

  • पहले: ₹55
  • अब: ₹60

3. मल्टिग्रेन ब्रेड

  • पहले: ₹60
  • अब: ₹65

4. स्मॉल ब्राउन लोफ

  • पहले: ₹28
  • अब: ₹30

5. व्हाइट लोफ

  • पहले: ₹20
  • अब: ₹22

6. ब्राउन ब्रेड

  • पहले: ₹45
  • अब: ₹50

मुंबई में ब्रेड की खपत सबसे ज्यादा मानी जाती है। यहां कामकाजी लोग, छात्र, मजदूर और ऑफिस जाने वाले लोग रोजाना ब्रेड और पाव से बने खाद्य पदार्थ खाते हैं। ऐसे में ब्रेड महंगी होने का असर सिर्फ किराना दुकानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वड़ा पाव, मिसल पाव, सैंडविच और अन्य स्ट्रीट फूड की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में होटल, कैंटीन और फास्ट फूड दुकानों में भी खाने-पीने की चीजें महंगी हो सकती हैं।

बेकरी संचालकों का कहना है कि पैकेजिंग सामग्री, ट्रांसपोर्टेशन, आयातित कच्चे माल और दूध जैसी जरूरी चीजों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। रुपये की कमजोरी ने उत्पादन लागत को और बढ़ा दिया है।

उनका कहना है कि लागत में लगातार इजाफा होने के कारण कीमत बढ़ाना मजबूरी बन गया था। हालांकि ग्राहक इस फैसले से परेशान नजर आ रहे हैं और उनका कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई ने घरेलू बजट बिगाड़ दिया है।

हर दिन लाखों लोग ब्रेड आधारित खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं। ऐसे में ब्रेड की कीमतों में यह बढ़ोतरी सीधे आम मुंबईकर की जेब पर असर डालेगी। खासकर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए रोजमर्रा का खर्च और बढ़ सकता है।

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