योगी कैबिनेट विस्तार पर अखिलेश का हमला-क्या ये सिर्फ समय काटने की कवायद?

जुबिली स्पेशल डेस्क
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। रविवार, 10 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने मंत्रिमंडल का बहुप्रतीक्षित विस्तार किया। राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 6 नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस फेरबदल में जहाँ नए चेहरों को जगह मिली है, वहीं दो मौजूदा मंत्रियों का कद बढ़ाते हुए उनका प्रमोशन भी किया गया है।
ये भी पढ़ें : योगी कैबिनेट 2.0 का विस्तार: ‘बंगाल मॉडल’ और ‘सोशल रिसेट’ से 2027 फतह की तैयारी
कैबिनेट में शामिल हुए नए चेहरे
योगी मंत्रिमंडल के इस विस्तार में भारतीय जनता पार्टी ने अपने पुराने दिग्गजों और नए सहयोगियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है:
- भूपेंद्र सिंह चौधरी: पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेकर सरकार में वापसी की है।
- मनोज पांडेय: समाजवादी पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा में शामिल हुए मनोज पांडेय को मंत्री बनाकर भाजपा ने ब्राह्मण वोटों को साधने का संकेत दिया है।
- अन्य प्रमुख नाम: सुरेंद्र दिलेर, कृष्णा पासवान, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत ने भी मंत्री पद की शपथ ली।
विशेष: इस विस्तार के माध्यम से भाजपा ने पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक के सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने का प्रयास किया है।
अखिलेश यादव का हमला: “CM का मतलब अब सिर्फ कूरियर-मैसेंजर”
मंत्रिमंडल विस्तार की खबर आते ही समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने इस विस्तार को केवल “समय काटने की कवायद” करार दिया।
सपा प्रमुख के वार के मुख्य बिंदु
- पर्ची वाली सरकार: अखिलेश ने आरोप लगाया कि मंत्रियों के नाम दिल्ली से तय होकर आते हैं। उन्होंने लिखा, “उधर से पर्ची आएगी, यहाँ तो सिर्फ पढ़ी जाएगी।”
- CM की नई परिभाषा: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा राज में मुख्यमंत्री (CM) का अर्थ अब केवल ‘Courier-Messenger’ रह गया है।
- कर्मफल का सिद्धांत: हाल ही में चर्चा में रही एक फिल्म का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि जनता पूछ रही है कि मंत्रीगण फिल्म आगे बैठकर देखेंगे या पीछे? उन्होंने उम्मीद जताई कि शायद ‘कर्मफल-कंसफल’ के सिद्धांत को समझकर सरकार में कुछ सुधार आए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
विस्तार से ठीक पहले भाजपा विधायक आशा मौर्य के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। उन्होंने अपनी पोस्ट में बागियों को तवज्जो दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की, जिससे साफ है कि पार्टी के भीतर भी इस विस्तार को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं।
योगी सरकार का यह कदम स्पष्ट रूप से 2027 की तैयारी है। एक तरफ जहाँ भाजपा ‘सबका साथ’ के मंत्र के साथ नए सहयोगियों को गले लगा रही है, वहीं विपक्ष इसे सत्ता बचाने की छटपटाहट बता रहा है। अब देखना यह होगा कि ये नए मंत्री धरातल पर कितना बदलाव ला पाते हैं।



