इश्क की रोटियाँ I खमीरी I एपिसोड 4

इश्क महलों में ही हो , ये कोई जरुरी तो नहीं … लहराती फसलों में , बहती नदी के किनारे , या फिर जंग के मैदान में … ये इश्क ही तो है जो हर जगह अपनी शिद्दत से मौजूद रहता है …. यहाँ तक की रोटियों में भी इश्क गुंथा हुआ है …… इश्क की रोटियाँ के चौथे एपिसोड में एक नयी कहानी के साथ हाज़िर हूँ .. मैं उत्कर्ष सिन्हा ….. कहानी खमीरी रोटी की है और शीर्षक है …. जंग के मैदान में रुबाब की दुआ…. तो सुनिए ….

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