ईरान-अमेरिका युद्ध: क्या दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर? C-Voter सर्वे में भारतीयों ने दिया चौंकाने वाला जवाब

दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, क्या ईरान और अमेरिका के बीच का संघर्ष परमाणु तबाही का कारण बनेगा? इस युद्ध का भारत और आपकी जेब पर क्या असर होगा? इन सवालों का जवाब जानने के लिए C-Voter ने मार्च महीने में एक व्यापक ‘वॉर सर्वे’ किया है। इस सर्वे में देश के हर जिले की जनता से उनकी राय ली गई।
सर्वे के मुख्य परिणाम: तटस्थता या समर्थन?
सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि भारतीय जनता युद्ध के पक्ष में नहीं है, लेकिन अगर स्थिति बिगड़ती है, तो उनकी प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं:
- 60% भारतीय चाहते हैं तटस्थता: मार्च के चौथे सप्ताह के आंकड़ों के अनुसार, 60% लोग चाहते हैं कि भारत इस युद्ध में किसी का पक्ष न ले और Neutral रहे।
- ईरान के प्रति बढ़ता रुझान: यदि भारत को किसी एक देश को चुनना पड़े, तो 74% भारतीयों ने ईरान का साथ देने की बात कही है।
भरोसे की जंग: अमेरिका बनाम ईरान
सर्वे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। समय के साथ अमेरिका पर भारतीयों का भरोसा घटा है और ईरान के प्रति बढ़ा है:
| समय (मार्च) | अमेरिका पर भरोसा | ईरान पर भरोसा |
| दूसरा हफ्ता (Wk-2) | 26% | 27% |
| तीसरा हफ्ता (Wk-3) | 26% | 38% |
| चौथा हफ्ता (Wk-4) | 15% | 58% |
निष्कर्ष: मार्च के दूसरे से चौथे हफ्ते के बीच ईरान के प्रति समर्थन में 31% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि अमेरिका के समर्थन में 11% की गिरावट आई है।
युद्ध का आपकी जिंदगी पर असर: तेल और महंगाई की मार
जनता केवल रणनीतिक रिश्तों को लेकर ही चिंतित नहीं है, बल्कि अपनी रसोई और बजट को लेकर भी आशंकित है। सर्वे में इन मुद्दों पर भी राय ली गई:
- ईंधन की कीमतें: युद्ध की स्थिति में कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आने का डर है।
- LPG सिलेंडर का संकट: सर्वे में शामिल लोगों ने रसोई गैस की उपलब्धता और उसकी बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है।
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत: क्या हमें अब खाना बनाने के लिए बिजली या अन्य विकल्पों की ओर बढ़ना चाहिए? जनता इस पर भी विचार कर रही है।
क्या यह परमाणु युद्ध की आहट है?
सर्वे में शामिल एक बड़ा हिस्सा मानता है कि अगर यह युद्ध बड़ा रूप लेता है, तो दुनिया ‘एटमी तबाही’ के मुहाने पर खड़ी हो सकती है। यही कारण है कि अधिकांश भारतीय भारत सरकार की ‘तटस्थ नीति’ का समर्थन कर रहे हैं।
C-Voter का यह सर्वे साफ संकेत देता है कि भारतीय जनता ईरान को एक भरोसेमंद सहयोगी के रूप में देख रही है। हालांकि, देश का एक बड़ा वर्ग अभी भी यही चाहता है कि भारत इस वैश्विक संकट में शांतिदूत की भूमिका निभाए और खुद को सीधे संघर्ष से दूर रखे।


