‘ट्रंप को उन्हीं की भाषा में जवाब’, ईरान से कहा-खुद को विजेता बताकर खत्म करे जंग

तेहरान/वाशिंगटन। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने अब एक ऐसे मोड़ पर दस्तक दी है जहाँ बंदूकों से ज़्यादा दिमाग का खेल शुरू हो गया है। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी जंग को 35 दिन से अधिक का समय हो चुका है। जहाँ एक ओर डोनाल्ड ट्रंप के बयानों में ‘समझौते’ और ‘पाषाण युग (Stone Age)’ जैसी विरोधाभासी धमकियाँ तैर रही हैं, वहीं ईरान के पूर्व विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने एक ऐसा कूटनीतिक दांव चला है जिसने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है।

“खुद को विजेता घोषित करे ईरान” – ज़रीफ़ की चौंकाने वाली सलाह

ईरान के ‘सॉफ्ट फेस’ माने जाने वाले जवाद ज़रीफ़ ने अमेरिकी पत्रिका फॉरेन अफेयर्स में एक लेख के जरिए तेहरान को ‘रणनीतिक पहल’ करने की सलाह दी है। ज़रीफ़ का मानना है कि अब समय आ गया है जब ईरान को रक्षात्मक रुख छोड़कर खुद को युद्ध का विजेता घोषित कर देना चाहिए।

उनका तर्क सीधा और धारदार है:

“ईरान को अपनी शर्तों पर युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा करनी चाहिए। यह कदम न केवल वर्तमान संघर्ष को रोकेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले बड़े टकरावों की ज़मीन भी छीन लेगा।”

ट्रंप पर बढ़ता दबाव और ईरान का अवसर

खबर के मुताबिक, ज़रीफ़ ने स्पष्ट किया है कि डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह के दबाव और अनिश्चितता में हैं, उनसे किसी ठोस समाधान की उम्मीद करना बेमानी है। ऐसे में ईरान को खुद आगे बढ़कर युद्ध की समाप्ति का फ्रेमवर्क तैयार करना चाहिए। यदि ईरान अनुकूल शर्तों पर समझौता करता है, तो वह बिना और अधिक सैन्य नुकसान उठाए इस पूरी जंग को अपने पक्ष में मोड़ने में सफल रहेगा।

कौन हैं जवाद ज़रीफ़: ईरान के वो चाणक्य जिन्होंने दुनिया को झुकाया

जवाद ज़रीफ़ केवल एक नेता नहीं, बल्कि ईरान की कूटनीति के सबसे मंझे हुए खिलाड़ी रहे हैं। उनके इस नए सुझाव को समझने के लिए उनका प्रोफाइल देखना ज़रूरी है:

  • शिक्षा और अनुभव: 1960 में तेहरान में जन्मे ज़रीफ़ ने अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय संबंधों की पढ़ाई की, जिससे उन्हें पश्चिम की नस-नस का पता है।
  • परमाणु समझौते के शिल्पकार: 2013 से 2021 तक विदेश मंत्री रहते हुए उन्होंने 2015 के ऐतिहासिक परमाणु समझौते (JCPOA) में मुख्य भूमिका निभाई थी।
  • संतुलित रुख: कट्टरपंथियों के विपरीत, ज़रीफ़ बातचीत और टेबल डिप्लोमेसी में विश्वास रखते हैं। उन्हें संयुक्त राष्ट्र में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि के रूप में लंबा अनुभव है।

विश्लेषण: क्या यह रणनीति काम करेगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि ज़रीफ़ की यह सलाह ईरान के लिए एक ‘एग्जिट रूट’ (बाहर निकलने का रास्ता) भी हो सकती है। खुद को विजेता बताकर युद्ध रोकना ईरान की घरेलू राजनीति में भी सरकार की छवि मजबूत करेगा और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका को बैकफुट पर धकेल देगा।

अब देखना यह है कि क्या तेहरान का वर्तमान नेतृत्व अपने इस पूर्व ‘संकटमोचक’ की सलाह मानकर ट्रंप को कूटनीतिक मात देता है या मध्य पूर्व की यह आग और भड़केगी।

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