इजराइल के खिलाफ ‘मुस्लिम वर्ल्ड’ का महामोर्चा: पाकिस्तान और सऊदी समेत 7 देशों ने घेरा, वेस्ट बैंक डेथ पेनल्टी कानून पर बवाल

यरूशलम/इस्लामाबाद। मिडिल ईस्ट में बारूद के ढेर पर बैठे देशों के बीच अब एक नए कानून ने आग में घी डालने का काम किया है। इजराइल की संसद (Knesset) द्वारा कब्जे वाले वेस्ट बैंक में ‘मौत की सजा’ (Death Penalty) के प्रावधान वाले कानून को मंजूरी दिए जाने के बाद दुनिया के सात बड़े मुस्लिम देशों ने इजराइल के खिलाफ साझा मोर्चा खोल दिया है।

इन 7 देशों ने जारी किया ‘जॉइंट डिक्लेरेशन’

गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र, इंडोनेशिया, जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब और यूएई के विदेश मंत्रियों ने एक असाधारण संयुक्त बयान जारी किया। इन देशों ने इजराइल के इस कदम को न केवल मानवाधिकारों का हनन बताया, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन करार दिया है।

क्यों भड़के हैं मुस्लिम देश? (मुख्य चिंताएं)

संयुक्त बयान में इजराइल के इस नए कानून को लेकर कई गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं

  • फिलिस्तीनियों को निशाना बनाने का डर: देशों का मानना है कि इस कानून का इस्तेमाल भेदभावपूर्ण तरीके से केवल फिलिस्तीनी कैदियों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किया जाएगा।
  • अमानवीय व्यवहार के आरोप: बयान में इजराइली जेलों में बंद फिलिस्तीनियों को दी जा रही यातनाओं, भोजन की कमी और अमानवीय व्यवहार पर गहरी चिंता जताई गई है।
  • शांति प्रक्रिया पर प्रहार: विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी कि ऐसे कानून मिडिल ईस्ट में रही-सही शांति की उम्मीदों को खत्म कर देंगे और पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा बनेंगे।
  • भेदभावपूर्ण तंत्र: मुस्लिम देशों ने इजराइल पर एक ऐसा ‘सिस्टम’ बनाने का आरोप लगाया जो फिलिस्तीनी पहचान और उनके अस्तित्व को ही चुनौती दे रहा है।

वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप की मांग

मुस्लिम ब्लॉक ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें। बयान में साफ कहा गया है कि इजराइल अपनी ‘कब्जा करने वाली शक्ति’ (Occupying Power) का गलत फायदा उठा रहा है और इसके लिए उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।

युद्ध के बीच नई कूटनीतिक घेराबंदी

विशेषज्ञों का मानना है कि यह एकजुटता इजराइल के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। एक तरफ हमास और हिजबुल्लाह के साथ सैन्य संघर्ष जारी है, वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों का इस कड़े रुख में शामिल होना इजराइल की कूटनीतिक घेराबंदी को दर्शाता है।

Related Articles

Back to top button