जुबिली न्यूज डेस्क
राजधानी पटना में 4 जुलाई की रात को व्यवसायी गोपाल खेमका की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद पूरे शहर में दहशत का माहौल है। मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शनिवार सुबह उच्चस्तरीय विधि-व्यवस्था समीक्षा बैठक बुलाई और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए।

सीएम नीतीश ने लिया हत्याकांड का संज्ञान
मुख्यमंत्री ने यह मीटिंग एक अणे मार्ग स्थित संकल्प भवन में की, जिसमें पुलिस महानिदेशक (DGP) समेत अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान सीएम ने गोपाल खेमका हत्याकांड पर विस्तृत जानकारी ली और निर्देश दिया कि –”अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ बिना भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाए। अगर हत्या के पीछे कोई गहरी साजिश है, तो उसकी गहराई से जांच की जाए और दोषियों को कानून के शिकंजे में लाया जाए।”
कानून-व्यवस्था में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: नीतीश कुमार
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि विधि-व्यवस्था सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि: अपराध नियंत्रण में कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे कितने ही प्रभावशाली क्यों न हों।जांच कार्य में तेजी लाएं और अपराधियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया को जल्द पूरा करें। पुलिस-प्रशासन को पूरी मुस्तैदी के साथ कार्य करना होगा ताकि जनता का भरोसा कायम रहे।
DGP ने दी अपडेट
मीटिंग में DGP ने प्रदेश में अपराध नियंत्रण को लेकर चल रही कार्रवाई की जानकारी सीएम को दी। उन्होंने बताया कि हत्याकांड में शामिल अपराधियों की पहचान के लिए जांच टीमों का गठन किया गया है और सीसीटीवी फुटेज समेत तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है।
पटना में बढ़ती आपराधिक घटनाएं बन रहीं चिंता का विषय
हाल के महीनों में राजधानी पटना में गोलीबारी और हत्या की घटनाओं में बढ़ोतरी ने आम जनता में असुरक्षा की भावना बढ़ा दी है। गोपाल खेमका जैसे प्रतिष्ठित व्यवसायी की हत्या ने न सिर्फ शहर बल्कि पूरे राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गोपाल खेमका हत्याकांड बिहार की कानून व्यवस्था के लिए एक कड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सीएम नीतीश कुमार के निर्देशों के बाद प्रशासन कितनी तेजी और पारदर्शिता से कार्रवाई करता है। बिहार सरकार के लिए यह वक्त निर्णायक है – या तो अपराधियों पर शिकंजा कसें, या फिर जनआक्रोश का सामना करें।
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