अखिलेश और ममता ने इसलिए बढ़ा दी है कांग्रेस की टेंशन

जुबिली स्पेशल डेस्क

लखनऊ। देश में अगले साल लोकसभा चुनाव होना है। कांग्रेस अभी से लोकसभा चुनाव पर नई रणनीति पर काम कर रही है जबकि अन्य दलों ने भी कमर कस ली है लेकिन अब भी बड़ा सवाल है कि बीजेपी को रोकने के लिए क्या पूरा विपक्ष एक होगा? हालांकि अब तक ऐसा नजर नहीं आ रहा है क्योंकि ममता, अखिलेश यादव और केसीआर जैसे बड़े नेताओं ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

उधर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी करन इसलिए शुरू कर दिया क्योंकि दोनों ने कांग्रेस को शामिल किए बिना आपसी सहमति से नया मोर्चा बना लिया है। दरअसल दोनों नेताओं ने शुक्रवार को मुलाकात की है और एक नये मोर्चा बनाने की बात सामने आ रही है।

जानकारी यहां तक मिल रही है कि ममता बनर्जी अगले हफ्ते ओडिशा के मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल के प्रमुख नवीन पटनायक से भी मुलाकात करने वाली हैं। ऐसे में कांग्रेस के लिए ये एक तरह का बड़ा झटका साबित हो सकता है।

टीएमसी के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने इस पूरे मामले पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने राहुल गांधी का मामला उठाते हुए कहा है कि राहुल गांधी ने विदेश में जाकर टिप्पणी की और जब तक वह माफी नहीं मांगते, बीजेपी संसद नहीं चलने देगी।

बीजेपी राहुल गांधी को विपक्ष के चेहरे के रूप में चाहती है जिससे बीजेपी को मदद मिले। पीएम के चेहरे पर फैसला करने की कोई जरूरत नहीं है।

 

उधर अखिलेश यादव भी लगातार अपनी पार्टी को मजबूती देने में लगे हुए हैं। हाल में चाचा शिवपाल यादव की सपा से इंट्री से पार्टी को मजबूती मिली है। कांग्रेस के साथ उनकी अभी तक कोई बात नहीं हुए लेकिन इसके बावजूद वो एक अलग रणनीति पर काम कर रहे हैं। उनकी इस नई रणनीति में कांग्रेस शामिल नहीं है। ऐसे में यूपी में अगर सपा कांग्रेस से हाथ नहीं मिलाती है तो इससे कांग्रेस को बड़ा नुकसान होना तय माना जा रहा है।

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