जानिये बच्चो का कितना नुक्सान करेगी कोरोना की तीसरी लहर

जुबिली न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. कोरोना महामारी की दूसरी लहर विदाई की बेला में है मगर इस महामारी की संभावित तीसरी लहर की वजह से दहशत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक रणदीप गुलेरिया का यह स्पष्ट मत है कि कोरोना प्रोटोकाल का सख्ती से पालन नहीं किया गया तो आने वाले 42 से 56 दिनों के भीतर तीसरी लहर अपनी दस्तक दे देगी.

भारत में हालांकि कोरोना पर काफी हद तक लगाम लगी है. नये मरीजों की तादाद जहाँ चार लाख तक रोजाना पहुँच गई थी वह अब घटकर 60 हज़ार रह गई है लेकिन इसके साथ ही बाज़ारों में भीड़ बढ़ी है. लोगों ने लापरवाही बढ़ा दी है. निदेशक एम्स की यह खुली चेतावनी है कि बाज़ारों में भीड़ न रोकी गई और कोविड प्रोटोकाल का पालन नहीं किया गया तो कोरोना की तीसरी लहर का सामना करना पड़ेगा.

डॉ. गुलेरिया का कहना है कि जब तक बड़ी संख्या में लोगों को वैक्सीन न लग जाए तब तक सड़कों और बाज़ारों में भीड़ कम करनी होगी. लोगों को अपने व्यवहार में कोविड प्रोटोकाल को ढाल लेना चाहिए. उनका कहना है कि अगर कोविड प्रोटोकाल का पालन कराने में दिक्कत हो रही है तो सरकार को लॉकडाउन का रास्ता अपनाना चाहिए.

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कोरोना की तीसरी लहर काफी घातक होगी. डॉ. गुलेरिया समेत कई विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना की तीसरी लहर का सबसे ज्यादा असर 18 साल से कम उम्र के बच्चो पर होगा. मगर इसका यह मतलब नहीं है कि बड़ी उम्र के लोगों पर इसका असर नहीं होगा. यह सभी को अपने शिकंजे में लेगी लेकिन ज्यादा नुक्सान बच्चो का होगा.

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