कौन जुटा है चिराग को नई रोशनी दिखाने में

जुबिली स्पेशल डेस्क

पटना। बिहार में इन दिनों कोई चुनाव नहीं है लेकिन वहां पर सियासी पारा लगातार बढ़ रह है। नीतीश सरकार कितने दिन चलेगी ये अटकले वहां पर काफी समय से लग रही है।

दरअसल नीतीश के पास बहुमत का आंकड़ा है लेकिन कम है। ऐसे में कोई भी दल इधर से उधर गया वैसे ही नीतीश सरकार खतरे में आ सकती है।

हालांकि नीतीश कुमार इस पर ज्यादा नहीं सोच रहे हैं। उधर कोरोना काल में लोक जनशक्ति पार्टी टूट गई है और चिराग को अलग-थलग कर दिया गया है।

कयास लगाये जा रहे हैं कि इसके जेडीयू का हाथ हो सकता है। हालांकि इस पूरे मामले में जेडीयू ने किसी भी तरह की कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है।

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लोक जनशक्ति पार्टी चिराग पासवान पूरी तरह से अपनी पार्टी में हाशिए पर जा पहुंचे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल है कि चिराग के पास अब क्या विकल्प है।

हालांकि चिराग पासवान को विपक्षी दलों ने अपनी पार्टी में शामिल होने का प्रस्ताव देने में देर नहीं की है। कांग्रेस से लेकर राष्ट्रीय जनता दल चाहती है चिराग उनकी पार्टी में शामिल हो जाये। राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस चाहती है कि वो उनकी पार्टी में आये और नीतीश को सत्ता से बेदखल करने में उनकी मदद करे।

लालू की पार्टी के विधायक भाई बिरेंद्र ने चिराग को लेकर बड़ा बयान दिया है।उन्होंने कहा है कि बिहार में अभी की राजनीतिक परिस्थिति में यह बिल्कुल अनुकूल है कि चिराग पासवान और तेजस्वी यादव एक साथ हाथ मिलाएं।

भाई बिरेंद्र ने कहा कि चिराग पासवान को तेजस्वी यादव को बिहार का मुख्यमंत्री बनाने में मदद करनी चाहिए और उन्हें पार्टी की दिल्ली की राजनीति संभालनी चाहिए।

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भाई विरेंद्र ने आगे कहा कि आम लोगों की मांग है कि जो हालात लोक जनशक्ति पार्टी में हुए हैं उसके बाद दोनों नौजवान नेता चिराग और तेजस्वी को एक साथ आना चाहिए। चिराग पासवान को तेजस्वी को मुख्यमंत्री बनाने के लिए मदद करना चाहिए उन्हें खुद राष्ट्रीय राजनीति संभाली चाहिए।

उधर कांग्रेस ने देर किये बगैर चिराग को अपनी पार्टी में शामिल होने के लिए ऑफर दे डाला है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रेमचंद्र मिश्रा की माने तो चिराग को कांग्रेस के साथ आना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि यही सही वक्त है, जब चिराग को कांग्रेस-महागठबंधन के साथ आना चाहिए। बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड को उनकी राजनीतिक औकात दिखाए।

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 अब देखना होगा क्या चिराग पासवन अपनी पार्टी छोड़ विपक्षी पार्टी के ऑफर को मान लेते हैं। कुल मिलाकर अब देखना होगा उनका अगला कदम क्या होगा

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