टिकरी बॉर्डर पर किसान ने फांसी लगाकर दी जान, सुसाइड नोट में लिखी ये वजह

जुबिली न्‍यूज डेस्‍क

कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर दिल्ली की अलग-अलग बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन पिछले 73 दिनों से जारी है। किसान और सरकार के टकराव से परेशान होकर अब तक 204 किसानों ने आत्‍महत्‍या कर ली है।  इस बीच दिल्ली-हरियाणा के टिकरी बॉर्डर पर बीती देर रात एक और किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। मरने से पहले मृतक किसान कर्मबीर ने सुसाइड लिखा जिसमें उन्होंने केंद्र सरकार के खराब रवैये के परेशान होने की बात लिखी है।

कर्मबीर ने सुसाइड नोट में लिखा- भारतीय किसान युनियन जिन्दाबाद। प्यारे किसान भाइयों ये मोदी सरकार तारीख पर तारीख देता जा रहा है इसका कोई अंदाजा नहीं कि ये काले कानून कब रद्द होंगे। जब तक ये काले कानून रद्द नहीं होंगे तब तक हम यहां से नहीं जाएंगे।

कर्मबीर (52) हरियाणा के जींद जिला के सिंघवाल गांव का रहने वाला थे। बीती रात ही वह अपने गांव से टिकरी बॉर्डर पहुंचे थे। कर्मबीर की तीन बेटियां हैं और एक बेटी की शादी हो चुकी है। बहरहाल, किसान का शव फंदे से निकाल कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है।

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आपको बता दें कि कुछ दिन पहले ही टिकरी बॉर्डर पर किसान जय भगवान ने जहर खा लिया था। किसान को गंभीर हालत में संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया था जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जय भगवान ने जहर खाने से पहले देशवासियों के नाम एक पत्र लिखा था।

इस बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट कर सरकार को घेरा है। उन्‍होंने कहा कि किसान-मज़दूर के गाँधी जयंती तक आंदोलन के निर्णय से उनके दृढ़ संकल्प के साथ ही ये भी साफ़ है कि वे मोदी सरकार से कितने नाउम्मीद हैं। अहंकार छोड़ो, सत्याग्रही किसानों की तकलीफ़ समझो और कृषि-विरोधी क़ानून वापस लो।

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