राष्ट्रपिता की जिंदगी के 10 अहम पड़ाव

जुबिली न्यूज डेस्क

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को इस दुनिया से गए 70 साल से अधिक हो गये। उनको लेकर इस देश में खूब विमर्श होता है। कोई उन्हें इस देश के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराता है तो कोई उन्हें कश्मीर के लिए। लेकिन यह भी बड़ा सच है कि गांधी के गाली देने वाले भी उन्हें नकार नहीं पाते। तभी तो उनके जन्मतिथि दो अक्टूबर और पुण्य तिथि 30 जनवरी को उन्हें मजबूरन याद करते हैं, क्योंकि वह जानते हैं कि उन्हें नकार पाना आसान नहीं है।

70 साल से ज्यादा हो गए जब भरी सभा में नाथूराम गोडसे ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या की थी। उन्हें तो मार दिया गया, लेकिन क्या गांधी खत्म हो पाए? तो चलिए एक नजर भारतीय स्वाधीनता संग्राम के इस नायक की जिंदगी के 10 अहम पड़ावों पर डालते हैं।

1869

दो अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ था।

1883

साल 1883 में उनके घरवालों ने कस्तूरबा मानकजी से मोहनदास की शादी करा दी। शादी के वक्त दोनों की उम्र 13 साल थी। शादी के बाद उनके चार बच्चे हुए। यह तस्वीर 1915 की है जब वे दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे।


1888-1891

साल 1888 से 1891 वह समय था जब गांधीजी ने लंदन में कानून की पढ़ाई की ताकि वह बैरिस्टर बन सकें। हालांकि उनके परिवार वाले उन्हें इतनी दूर भेजने को तैयार नहीं थे, बावजूद वह गए।

1893-1915

यह वह समय था जो गांधी जी के जिंदगी को बदलने का काम किया। गांधी को गांधी बनाने में उनके दक्षिण अफ्रीका प्रवास का अहम योगदान था। वहां उन्होंने एक वकील के तौर पर जिंदगी शुरू की। यहीं 1913 में उन्होंने पहला अहिंसक आंदोलन किया।

1922

साल 1922 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में नैतिकता का स्तंभ बनने के बाद महात्मा गांधी ने ब्रिटिश राज के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन छेड़ा। उन्हें गिरफ्तार किया गया और वे दो साल जेल में रहे।

1930

उन्होंने ब्रिटिश सरकार के नमक कानून के खिलाफ साल 1930 में अहिंसक मार्च निकाला। अहमदाबाद में अपने आश्रम से पैदल 350 किलोमीटर का सफर तय कर वह दांड़ी तक गए। उन्हें दस हजार लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया।

1932

साल 1932 में गांधी जी ने जेल में “अछूतों” के लिए अलग से चुनाव क्षेत्र रखने की योजना के खिलाफ आमरण अनशन किया। वह अनशन को कई बार हथियार की तरह इस्तेमाल करते थे।

1942

साल 1942 में गांधी जी ने ‘अंग्रजो भारत छोड़ो’ आंदोलन का बिगुल बजाया। उन्हें गिरफ्तार किया गया और 1944 तक जेल में रखा गया।

1947

देश के लिए गर्व का छड़ रहा साल 1947। इसी साल भारत को अंग्रेजी राज से आजादी मिली। गांधी नहीं चाहते थे कि भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो, लेकिन सांप्रदायिक दंगों के बीच उन्होंने दिल पर पत्थर रख कर आखिर इसे स्वीकार किया।

1948

यह वह साल है जिसे कोई नहीं भूल सकता। 30 जनवरी 1948 को नई दिल्ली में एक प्रार्थना सभा के दौरान नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मार कर हत्या कर दी। उनकी यात्रा में बीस लाख लोगों ने हिस्सा लिया।

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