मायावती सरकार में कथित स्मारक घोटाले मामले में ED ने BJP विधायक पर कसा शिकंजा

जुबिली स्पेशल डेस्क

उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की सरकार के दौरान कथित तौर पर हुए 1400 करोड़ रुपये के स्मारक घोटाले को लेकर अब प्रवर्तन निदेशालय ने सख्त रूख अपना लिया है और इसी के तहत भारतीय जनता पार्टी के विधायक फंसते नजर आ रहे हैं।

प्रवर्तन निदेशालय ने स्मारक घोटाले में विधायक टी राम को तलब किया है। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग के तत्कालीन प्रमुख अभियंता त्रिभुवन राम को भी हाजिर होने के लिए बोला गया है।

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जानकारी के मुताबिक वित्तीय परामर्शदाता विमलकांत मुद्गल, महाप्रबंधक तकनीकी एसके त्यागी, महाप्रबंधक सोडिक कृष्ण कुमार,इकाई प्रभारी कामेश्वर शर्मा को शुक्रवार को विजिलेंस टीम ने गिरफ़्तार किया है। सभी लोगो से कड़ी पूछताछ की जा रही है।

क्या है पूरा मामला

 

2007 से 2011 लखनऊ और नोएडा में बने स्मारकों में घोटाले की बात कही गई थी। इस दौरान लखनऊ और नोएडा में बने स्मारकों में लगे पत्थरों के ऊंचे दाम वसूले की बात सामने आई थी।

 

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बताया जा रहा है की मिर्जापुर में एक साथ 29 मशीनें लगाई गई लेकिन सच कुछ और था। दरअसल कागजों में दिखाया गया था कि पत्थरों को राजस्थान ले जाकर वहां कटिंग कराई गई, फिर तराशा गया। इतना ही नहीं ढुलाई के नाम पर भी पूरा खेल कर दिया गया था। करोड़ों रुपये के हेर-फेर किया गया।

ऐसा किया गया पूरा घोटाला

कंसोर्टियम बनाया गया जो कि खनन नियमों के खिलाफ था। इसका आलावा 840 रुपए प्रति घनफुट के हिसाब से ज्यादा वसूली की गई।

मंत्रियों, अफसरों और इंजीनियरों ने अपने चहेतों को मनमाने ढंग से पत्थर सप्लाई का ठेका दिया और मोटा कमीशन लिया।

जांच में यह बात भी सामने आयी थी कि मनमाने ढंग से अफसरों को दाम तय करने के लिए अधिकृत कर दिया गया था। ऊंचे दाम तय करने के बाद पट्टे देना शुरू कर दिया गया था। सलाहकार के भाई की फर्म को मनमाने ढंग से करोड़ों रुपये का काम दे दिया गया था।

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