विमेंस प्रीमियर लीग 2026 को इस बार भी नया चैंपियन नहीं मिला। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) ने दिल्ली कैपिटल्स को हराकर दूसरी बार WPL की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। गुरुवार को खेले गए खिताबी मुकाबले में आरसीबी ने 6 विकेट से जीत दर्ज की और ट्रॉफी के साथ बड़ी इनामी राशि भी हासिल की। वहीं दिल्ली कैपिटल्स के लिए कहानी एक बार फिर वही रही—फाइनल तक पहुंचने के बावजूद खिताब हाथ से फिसल गया।
WPL 2026 प्राइज मनी लिस्ट
विजेता: रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB)
प्राइज मनी: 6 करोड़ रुपये
उपविजेता: दिल्ली कैपिटल्स (DC)
प्राइज मनी: 3 करोड़ रुपये
प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट: सोफी डिवाइन
प्राइज मनी: 5 लाख रुपये
ऑरेंज कैप (सबसे ज्यादा रन): स्मृति मंधाना
प्राइज मनी: 5 लाख रुपये
पर्पल कैप (सबसे ज्यादा विकेट): सोफी डिवाइन
प्राइज मनी: 5 लाख रुपये
टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा छक्के:
सोफी डिवाइन – 5 लाख रुपये
बेस्ट स्ट्राइक रेट अवॉर्ड:
ग्रेस हैरिस – 5 लाख रुपये
फाइनल का प्लेयर ऑफ द मैच:
स्मृति मंधाना – 2.5 लाख रुपये
इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन:
नंदिनी शर्मा – 5 लाख रुपये
मैच का हाल
फाइनल मुकाबले में पहले बल्लेबाजी करते हुए दिल्ली कैपिटल्स ने 20 ओवर में 4 विकेट खोकर 203 रन का बड़ा स्कोर खड़ा किया। टीम को सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा (20) और लिजेल ली (37) से अच्छी शुरुआत मिली। मिडिल ओवर्स में कुछ विकेट गिरने से रनगति पर असर पड़ा, लेकिन जेमिमा रोड्रिगेज ने 57 रनों की अहम पारी खेलकर दिल्ली को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। अंतिम ओवरों में तेज रनों की बदौलत दिल्ली ने 200 से ज्यादा का स्कोर बनाया, जिसे फाइनल के दबाव में आसान लक्ष्य नहीं माना जा रहा था।
स्मृति–वोल की साझेदारी ने पलटा मुकाबला
लक्ष्य का पीछा करने उतरी आरसीबी की शुरुआत झटके के साथ हुई और ग्रेस हैरिस 9 रन बनाकर आउट हो गईं। इसके बाद कप्तान स्मृति मंधाना ने जॉर्जिया वोल के साथ मिलकर पारी को संभाला। वोल ने 79 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि मंधाना ने कप्तानी जिम्मेदारी निभाते हुए तेज और आक्रामक बल्लेबाजी की। दोनों की लंबी साझेदारी ने दिल्ली के गेंदबाजों को दबाव में ला दिया और मैच पूरी तरह आरसीबी के पक्ष में चला गया।
अंतिम ओवरों में कुछ विकेट जरूर गिरे, लेकिन आरसीबी ने धैर्य बनाए रखा और 19.4 ओवर में लक्ष्य हासिल कर खिताब अपने नाम कर लिया।
दिल्ली का चौथा फाइनल, चौथी बार निराशा
दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह लगातार चौथा फाइनल था, लेकिन टीम एक बार फिर ट्रॉफी जीतने से चूक गई। हर सीजन में शानदार प्रदर्शन के बावजूद निर्णायक मुकाबले में जीत दर्ज न कर पाना दिल्ली की सबसे बड़ी कमजोरी बनता जा रहा है। यह हार खिलाड़ियों के साथ-साथ फ्रेंचाइज़ी और फैंस के लिए भी बेहद निराशाजनक साबित हुई।
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