घर लौटे मजदूरों का फूलों से हुआ स्वागत

  • आधी रात को घर लौटे मजदूर
  • स्टेशन पर हुआ चेक अप
  • सैनिटाइज बसों से भेजे जाएंगे गांव

न्यूज डेस्क

रांची के हटिया स्टेशन पर कल रात एक अलग ही नजारा था। महीनों से तेलंगाना के अलग-अलग शहरों में फंसे मजदूर स्पेशल टे्रन से अपने राज्य झारखंड के हटिया स्टेशन पर पहुंचे, उनकी आंखे बरबस भीग गई। ये श्रमिक अपने आंसुओं को जब्त करने की कोशिश करते रहे लेकिन कामयाब नहीं हुए।

तेलंगाना के अलग-अलग शहरों में फंसे झारखंड के लगभग 1200 मजदूर आधी रात को विशेष ट्रेन से रांची पहुंचे। यहां से सैनिटाइज्ड बसों में इन मजदूरों को इनके गृह जिलों में पूरे एहतियात और जांच के साथ भेजा जा रहा है।

यह भी पढ़ें :  20 दिनों बाद नजर आए किम जोंग उन

तेलंगाना के लिंगमपल्ली से खुली ये ट्रेन जैसे ही रांची से सटे हटिया स्टेशन पहुंची, ट्रेन में बैठे मजदूर झूठ उठे। कई मजदूरों की आंखों में आंसू आ गए।

रात सवा ग्यारह बजे के करीब जैसे ही ट्रेन हटिया स्टेशन पर रुकी, मजदूरों की चेहरे की चमक में पिछले 40 दिनों की सारी मुश्किलें छिप गईं। रेलवे स्टेशन पर इन मजदूरों का मेहमानों की तरह स्वागत हुआ, राज्य सरकार के अधिकारियों ने इन्हें गुलाब के फूल दिए और इनके लिए खाने की व्यवस्था की।

लॉकडाउन के बाद ट्रेन सेवाएं ठप होने के बाद ये पहली ट्रेन है, जो झारखंड के मजदूरों को लेकर आई है।


रामगढ़ के एक मजदूर ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं, इतना खुश कि शब्दों में बता नहीं सकता, हमें वहां ठीक खाना मिल रहा था, यहां भी हमें ठीक व्यवस्था मिली है। ”

रांची के डिप्टी कमिश्नर महिमापत राय ने हटिया स्टेशन पर पत्रकारों से कहा कि स्टेशन पर इनकी प्राथमिक जांच की गई, इसके बाद इन्हें बसों से भेजा जा रहा है। इनके जिले में भी इनकी जांच की जाएगी। इसके बाद इन्हें होम क्वारनटीन किया जाएगा, अगर किसी में भी कोई लक्षण दिखते हैं तो उन्हें अलग रखा जाएगा।

इससे पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हटिया स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने स्टेशन में अधिकारियों से व्यवस्था का जायजा लिया।

यह भी पढ़ें : कोरोना : भारत में असरकारी होगा रेमडेसिवियर?

मुख्यमंत्री सोरेन ने मजदूरों का स्वागत किया और कहा कि स्वागत है साथियों। तेलंगाना से अपने घर पहुंचे श्रमिक साथियों की उचित जांच, गुलाब का फूल, भोजन एवं सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते हुए स्वागत किया गया।

24 बोगियों की ये ट्रेन तेलंगाना के लिंगमपल्ली स्टेशन से 1200 मजदूरों को लेकर शुक्रवार सुबह 4.50 पर रवाना हुई थी। सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का ख्याल रखते हुए 72 पैसेंजर की क्षमता वाले एक डिब्बे में 54 मजदूरों को ही बिठाया गया था। एक कूपे में 8 की जगह 6 लोगों के बैठने की इजाजत दी।

यह भी पढ़ें : नौकरियां बचानी हैं तो तुरंत खोलनी चाहिए अर्थव्यवस्था  

यह भी पढ़ें :  किम जोंग उन के बाद उत्तर कोरिया का मुखिया कौन ?

Related Articles

Back to top button