फूल भला क्यों प्रेम करेगा कौन गायेगा कोयल…!

फूल भला क्यों प्रेम करेगा
कौन गायेगा कोयल राग
उपवन मे जब पतझर होगा,
कहां पियेगा भ्रमर पराग।
वासना से कब मिलता है,
प्रियतम का अविनाशी विश्वास
हास नही बस पीड़ा मे है
जीवन का नैसर्गिक उन्माद,
पीड़ा मे संगीत बसा है,
कैसे करूं उसका प्रतिवाद।
नि:श्वासों मे मलय समीर है,
विश्वासो का कैसा ये हार,
तुम्ही बता दो कैसे होगा
मेरी पीड़ा का उपचार।

    अशोक श्रीवास्तव

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