ऑक्सीजन को लेकर केंद्र के बयान में इतना अंतर क्यों है ?

जुबिली न्यूज डेस्क

देश के इतिहास में शायद पहली बार ऐसी तस्वीरें सामने दिखाई दे रही हैं। कहीं बेटे की गोद में बाप का दम निकल रहा है तो कहीं तो कोई बेड के लिए संघर्ष कर रहा है। कोई ऑक्सीजन की कमी से मर रहा है तो कोई अंतिम संस्कार के लिए भी आखिरी सफर पर लड़ रहा है। हर तस्वीर साफ कह रही है कि भारत में कोरोना के आगे सरकार के सारे सिस्टम फेल हो गए हैं।

सरकार की बदइंतजामी की गवाही तस्वीरें दे रही है, बावजूद सरकार मानने को तैयार नहीं है कि कोई परेशानी है। इस समय सबसे बड़ा मुद्दा ऑक्सीजन का है।

देश के कई राज्यों से ऑक्सीजन की कमी की बात सामने आ रही है लेकिन केंद्र के मंत्री का कहना है कि ऑक्सीजन की कोई किल्लत नहीं है।

ऑक्सीजन को लेकर केंद्र सरकार ने एक बयान जारी कर कहा है कि भारत में ऑक्सीजन पूरी क्षमता से पैदा हो रही है और पिछले दो दिनों में इसका आउटपुट भी बढ़ा है, लेकिन दूसरे बयान में यह भी माना है कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और गुजरात समेत देश के 12 राज्य ऑक्सीजन की ज्यादा खपत वाले राज्य हैं, जहां इसकी कमी पैदा हो गई है।

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 फिलहाल अब केंद्र सरकार ने मदद के लिए आगे आते हुए 100 नए अस्पतालों में पीएम केयर्स फंड की सहायता से ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का ऐलान किया है।

सरकार ने गुरुवार को ही राज्यों से मेडिकल ऑक्सीजन का तर्कसंगत उपयोग करने और यह सुनिश्चित करने को कहा कि इसकी बर्बादी न हो। साथ ही उसने कहा कि देश में ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन राज्यों को ऑक्सीजन के स्रोत पैदा करने के मार्गदर्शन के लिए एक फ्रेमवर्क तैयार किया जा रहा है।

सरकार के बयान के अनुसार अस्पतालों को मेडिकल ऑक्सीजन उत्पादन में मदद करने के लिए इनके परिसरों में 162 प्रेशर स्विंग अब्सॉर्प्शन प्लांट्स लगाए जाएंगे।

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पीएम केयर्स फंड के तहत आवंटित इन प्लांट्स के जल्द तैयार होने की समीक्षा की जा रही है। इसके अलावा सरकार दूर-दराज के इलाकों में 100 और अस्पतालों की पहचान कर रही है, जहां PSA प्लांट्स लगाए जाएंगे।

मालूम हो कि केंद्र ने जिन 12 राज्यों में ऑक्सीजन की किल्लत की बात मानी है, उनमें महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं।

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