गांधी…..मरता क्यों नहीं ?

स्मिता जैन रेवा 

नश्वर जगत में जब हम खुद को जानने लगते हैं तब हम अपने आप को गांधी के विचारों के नजदीक पातें हैं क्योंकि जीवन का आधार ही सत्य ,अहिंसा ,अपरिग्रह ,करुणा ,दया के शाश्वत सिद्धांतों पर आधारित है। जब इंसान मां के गर्भ में आता है तो वह स्त्री पुरुष के प्रेम की अतिरेक भावना से ही संबंध बनता है और उसी संबंध से ही एक जीवन की उत्पत्ति की शुरुआत होती है।

हमारा लालन -पालन ,शिक्षा, स्वास्थ्य और आवश्यकतायें सब कुछ इन्हीं सिद्धांतों पर आश्रित है। कहीं पर भी असत्य, हिसा ,क्रूर्रता और छल -कपट पर आश्रित नहीं है। सचमुच जीवन बहुत ही सहज और सरल होता है ।चाहे हमारा हो ,जीव जंतुओं का हो या वनस्पतियों का। सभी का जीवनयापन बहुत ही सीमित संसाधनों पर आधारित होता है लेकिन हम सभी इसको बहुत ही वैभवशाली बनाने के चक्कर में पड़े रहते हैं और खुद को संपत्ति कमाने की टकसाल बना डालते हैं और जीवन का सबसे खूबसूरत उद्देश्य जिंदगी जीना जिसे हम भूल जाते हैं।

वह अनमोल जिंदगी जो सिर्फ हमें एक ही बार मिलती है उसी को हम तहस- नहस कर देते हैं और जीवन के अंतिम पड़ाव पर कुछ भी नहीं कहने की स्थिति में पहुंच जाते हैं। कई बार हमें अंतिम पड़ाव में महसूस होता है कि हम शायद ज़िन्दगी को जीना ही भूल गए और फिर से हम उसे जीने की कोशिश करते हैं लेकिन क्या गुजरा हुआ समय हमें लौट कर मिल सकता है । वह जवानी और वह रिश्ते और उन रिश्तो में छुपा हुआ ढेर सारा प्यार और देखभाल जो हमारी वास्तविक विरासत होती है। एक मनुष्य के तौर पर अपने लिए और अपनों के लिए।

गांधी जी को मारने वाले हत्यारे नाथूराम गोडसे ने अपने भ्रम की संतुष्टि के लिए गांधी जी को मार तो डाला लेकिन वह और उसके बदजुबान और हिंसक अनुयायी आज भी पूरी तरह से असफल हैं गांधीजी को मिटाने केलिए। वह जितने भी कुत्सित प्रयास करते हैं गांधी जी हमारे उतने ही नजदीक और करीब होते जा रहे हैं। दुनिया की सारी शक्तियां भी एक हो जाए तब भी विश्व में नया गांधी पैदा नहीं कर सकती हैं । सारा पूंजीवाद और सांप्रदायिक हिंसक वातावरण गांधी जी को और उनके अस्तित्व को मिटा नहीं पा रहा है।

मुझे यह कहते हुए अंतर्मन से गर्व महसूस होता है कि मैंने अपने जीवन में गांधी जी को मानने और समझने वाले लोगों को अपने जीवन में शामिल किया। मुझे प्रेरणा,उत्साह और ताकत आज इन्हीं सिद्धांतों से प्राप्त होती है। क्योंकि गांधी दर्शन में हर एक जीव से प्यार, दया ,करुणा को जिया जाता है। सत्य ,अहिंसा के शक्तिशाली सिद्धांतों के साथ। जिसमें हमें किसी भी प्रकार से छल -कपट, दुराचार को अपने जीवन में स्वीकार करने की और मानने की मजबूरी नहीं होती है।
किसी भी प्रकार के कर्मकांड और पाखंड और दिखावा को नहीं मानना पड़ता है और अपने मन को शान्त और स्थिरता के साथ सृजनात्मक से जीने से बहुत ही ज्यादा सुकून मिलता है। शायद वह सूकून जो लाखों करोड़ों रुपए खर्च करके भी प्राप्त नहीं किया जा सकता है। आत्मिक शांति और सद्भावना जो जीवन की सच्ची ऊर्जा है और हमारी पहली आवश्यकता भी है। इतने हथियारों के बाद भी आज संपूर्ण विश्व में शांति और सद्भावना नहीं है तो इसका मूल सिर्फ हमारी सोच और उसके संचालन में ही गड़बड़ी को ठीक करने की जरूरत को बताता है।

और फिर यही हमें हाथ में एक लाठी, आंखों में गोल चश्मे वाले एक निडर निर्भीक, सहज और सरल मुस्कुराते प्यारे बापू नजर आते हैं। यह महान भारत भूमि कभी भी बापू- गांधी जी का अहसान नहीं चुका सकती है।

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