LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा क्यों हुआ? सरकार ने जारी की फैक्ट शीट, बताई असली वजह
वैश्विक कीमतों में उछाल का असर, फिर भी बाजार दर से सस्ता मिल रहा घरेलू सिलेंडर: सरकार

जुबिली स्पेशल डेस्क
घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी के बाद देशभर में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष ने जहां इस कदम पर सरकार की आलोचना की है, वहीं सरकार ने इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए एक फैक्ट शीट जारी की है।
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लेना पड़ा। मार्च 2026 में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस (Saudi CP) — जो भारत के लिए एलपीजी का प्रमुख वैश्विक मानक है — बढ़कर 542 डॉलर प्रति मीट्रिक टन हो गया है। यह नवंबर 2025 के न्यूनतम स्तर 466 डॉलर प्रति मीट्रिक टन से काफी ज्यादा है।
इसके बावजूद सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को पूरी कीमत नहीं चुकानी पड़ रही है। दिल्ली में 14.2 किलो के गैर-सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत 853 रुपये है, जबकि इसकी वास्तविक बाजार कीमत लगभग 987 रुपये होती है। यानी सरकार करीब 134 रुपये प्रति सिलेंडर का बोझ खुद वहन कर रही है।
आयात पर निर्भरता भी बड़ी वजह
सरकार के अनुसार भारत अपनी 60 प्रतिशत से अधिक एलपीजी जरूरत आयात करता है। इसलिए घरेलू कीमतें वैश्विक बाजार से सीधे प्रभावित होती हैं।
आंकड़ों के मुताबिक 2020-21 में सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस 415 डॉलर प्रति मीट्रिक टन था, जो 2022-23 में बढ़कर 712 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक पहुंच गया। उस समय उपभोक्ताओं पर बोझ कम रखने के लिए सरकार ने तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 22,000 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया था।
उज्ज्वला योजना लाभार्थियों पर कम असर
सरकार के मुताबिक प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाले सिलेंडर अभी भी काफी सस्ते हैं। मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच वैश्विक कीमतों का औसत 575 डॉलर प्रति मीट्रिक टन रहा, लेकिन उज्ज्वला लाभार्थियों के लिए सिलेंडर की कीमत 503 से 613 रुपये के बीच रही।
सरकार का दावा है कि इससे गरीब परिवारों के दैनिक खर्च पर बहुत कम असर पड़ा है। खाना पकाने की औसत लागत 7.31 रुपये से बढ़कर 8.11 रुपये प्रतिदिन हो गई है, यानी प्रति परिवार करीब 80 पैसे और प्रति व्यक्ति लगभग 20 पैसे का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
पड़ोसी देशों से अब भी सस्ता गैस सिलेंडर
सरकार का कहना है कि भारत में एलपीजी अभी भी क्षेत्र के कई देशों से सस्ता है। दिल्ली में उज्ज्वला लाभार्थियों को 14.2 किलो सिलेंडर 613 रुपये में मिलता है, जबकि पाकिस्तान में इसकी कीमत लगभग 1046 रुपये, श्रीलंका में 1242 रुपये और नेपाल में 1208 रुपये है।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार वैश्विक कीमतों के कारण तेल विपणन कंपनियों को 2024-25 में करीब 40,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इसमें से सरकार ने 30,000 करोड़ रुपये की सहायता देकर राहत दी।
एलपीजी पहुंच में बड़ा विस्तार
- सरकार ने यह भी बताया कि 2014 के बाद देश में एलपीजी पहुंच में बड़ा विस्तार हुआ है।
- घरेलू ग्राहकों की संख्या 14.51 करोड़ से बढ़कर 33.31 करोड़ हो गई
- एलपीजी खपत 17.6 एमएमटी से बढ़कर 32 एमएमटी पहुंच गई
- पाइपलाइन नेटवर्क 2,311 किमी से बढ़कर 6,242 किमी हो गया
सरकार का दावा
सरकारी सूत्रों के अनुसार यह बढ़ोतरी तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ताओं को राहत के बीच संतुलन बनाने के लिए की गई है। साथ ही सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा के लिए अब भारत 40 देशों से तेल और गैस आयात कर रहा है और लगभग 33 करोड़ उपभोक्ताओं को एलपीजी सुविधा मिल रही है।



