अखिलेश को किस बात का सता रहा है डर?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सबसे पुरानी पार्टी समाजवादी पार्टी की भी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। दरअसल सपा के कई विधायक अब खुलेआम बगावत करते हुए नजर आ रहे हैं।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने महासचिव का पद छोड़ दिया है और वो सपा में कितने दिन रहेंगे, इसको लेकर कयास लगाये जा रहे हैं। वहीं राज्यसभा चुनाव को लेकर भी सपा में घमासान मचा हुआ है। यूपी में उच्च सदन की 10 सीटें हैं, जबकि उम्मीदवार 11 हो गए हैं। ऐसे में सपा के लिए मुश्किल भरा वक्त हो गया है। सपा में बगावती तेवर देखने को मिल रहा है।


राज्यसभा प्रत्याशियों के ऐलान के बाद चर्चा है कि समाजवादी पार्टी के विधायक इंद्रजीत सरोज अपने 3-4 विधायकों के साथ भाजपा के संपर्क में हैं जबकि इंद्रजीत सरोज, बीजेपी एमएलसी रामचंद्र प्रधान के समधी हैं। वहीं समाजवादी पार्टी पर आरोप लग रहा है कि उसने पीडीए को दर किनार कर राज्यसभा के उम्मीदवार उतारे हैं।

इसलिए वो सपा का साथ नहीं देंगी जबकि स्वामी प्रसाद मौर्य ने सपा के महासचिव का पद छोड़ दिया है और स्वामी प्रसाद पार्टी से खासकर अखिलेश यादव से भी काफी नाराज है जबकि उनके करीबी पूर्व विधायक बृजेश प्रजापति ने भी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। ऐसे में सपा की तरफ से राज्यसभा उम्मीदवार आलोक रंजन और जया बच्चन का राज्यसभा पहुंचना काफी मुश्किल भरा हो सकता है।

ऐसे में सपा अब उन विधायकों पर नजर बना ली है जो इस वक्त जेल में बंद है। समाजवादी पार्टी जेल में बंद विधायकों को राज्यसभा चुनाव में वोट देने के लिए कानूनी प्रक्रिया पर सलाह ले रही है।

आपकी जानकारी के लिए बताना चाहेंगे किकानपुर से विधायक इरफान सोलंकी, आजमगढ़ से विधायक रमाकांत यादव जेल में बंद हैं, जबकि सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की टिकट पर चुनाव लड़े मऊ से विधायक अब्बास अंसारी को भी जेल में बंद है।

ऐसे में सपा कानूनी प्रक्रिया के तहत इनका वोट हासिल करना चाहती है। कुल मिलाकर कांग्रेस की तरह अब सपा में बगावत देखने को खूब मिल रही है। लोकसभा चुनाव से पहले इस तरह की बगावत सपा को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।

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