हरिद्वार धर्म संसद पर क्या बोले इमरान खान?

जुबिली न्यूज डेस्क

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने बीते दिसंबर माह में हरिद्वार में हुए धर्म संसद में धार्मिक नेताओं के बयान पर मोदी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया है।

इमरान खान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वो भारत की मोदी सरकार के कट्टरपंथी एजेंडा पर ध्यान दे और उसके खिलाफ कार्रवाई करे।

इमरान खान ने सोमवार को एक ट्वीट में कहा कि भाजपा की कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित मोदी सरकार के अधीन सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों को हिंदुत्व संगठन निशाना बना रहे हैं।

पाक पीएम ने कहा है कि भारत में अल्पसंख्यकों खासकर 20 करोड़ मुसलमानों के नरसंहार के लिए दिसंबर में आयोजित एक कट्टरपंथी हिंदुत्व सम्मेन में आह्वान किया गया था। इस मामले पर मोदी सरकार की लगातार चुप्पी ये सवाल उठाती है कि क्या बीजेपी सरकार इस आह्वान का समर्थन करती है।

मालूम हो कि यूपी के हरिद्वार में 17 से 19 दिसंबर को आयोजित धर्म संसद में हिंदुत्व को लेकर साधु-संतों के विवादित भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे।

इन वीडियो में धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र उठाने, मुस्लिम आबादी न बढऩे देने, मुस्लिम प्रधानमंत्री न बनने देने समेत धर्म की रक्षा के नाम पर विवादित भाषण देते हुए साधु-संत दिखाई दिए थे।

इतना ही नहीं महिला संत भी कॉपी-किताब रखने और हाथ में शस्त्र उठाने जैसी बात कहती हुई नजर आई थीं। इस आयोजन से संबंधित वीडियो के वायरल होने के कई घंटे बाद तक पुलिस प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई जिसके चलते जिला प्रशासन पर सवाल उठने लगे थे।

हालांकि बाद में उत्तराखंड पुलिस ने कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

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इसके बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। हरिद्वार में हुई भड़काऊ भाषणबाजी को लेकर पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में भारतीय राजनयिक को तलब भी किया था।

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पाक के विदेश मंत्रालय ने भारतीय दूतावास के सबसे वरिष्ठ राजनयिक एम. सुरेश कुमार को अपनी ‘गंभीर चिंताओं’ से अवगत कराया था।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता आसिम इफ़्तिख़ार अहमद ने बयान जारी कर बताया था कि भारतीय चार्ज डी अफ़ेयर्स को विदेश मंत्रालय, इस्लामाबाद में तलब किया गया और भारतीय मुसलमानों के नरसंहार करने के हिंदुत्व समर्थकों के खुलेआम आह्वान पर पाकिस्तान सरकार की गंभीर चिंताओं से भारत सरकार को अवगत कराने को कहा गया।

पाकिस्तान ने उस समय भी कहा था कि भारत सरकार ने न इस पर खेद जाहिर किया और न ही इसकी निंदा की और न ही इसके खिलाफ कोई कार्रवाई की।

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