West Asia War Impact: तेल संकट से दुनिया में हड़कंप, आपकी जेब पर सीधा असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब सीधे आम लोगों की जेब पर असर डालने लगा है। United States, Israel और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष के बाद महज एक महीने में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 60% की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जो कच्चा तेल पहले 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, वह अब 113.75 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर चुका है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बना संकट की जड़

इस वैश्विक संकट के केंद्र में Strait of Hormuz है, जिसे दुनिया की तेल सप्लाई की लाइफलाइन माना जाता है।

  • सैन्य तनाव के कारण इस समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित
  • ग्लोबल सप्लाई चेन पर सीधा असर
  • तेल की उपलब्धता कम, कीमतें तेजी से बढ़ीं

जब सप्लाई रुकती है, तो बाजार में घबराहट बढ़ती है और यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में इस समय भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

कतर और इराक में उत्पादन पर बड़ा असर

तेल संकट सिर्फ ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

  • Qatar में LNG उत्पादन क्षमता में करीब 17% गिरावट
  • Iraq ने तेल क्षेत्रों में ‘फोर्स मेज्योर’ लागू किया
  • बसरा ऑयल कंपनी का उत्पादन 33 लाख बैरल से घटकर 9 लाख बैरल प्रतिदिन

इन हालात ने वैश्विक बाजार में आपूर्ति संकट को और गहरा कर दिया है।


भारत में भी दिख रहा असर

इस संकट की आंच भारत तक भी पहुंच चुकी है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका

WTI क्रूड 101.43 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा

MCX पर कच्चा तेल 9,601 रुपये प्रति बैरल के करीब

135 डॉलर तक जा सकता है तेल?

वित्तीय संस्था Goldman Sachs ने 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का अनुमान बढ़ाकर 85 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है:

  • सप्लाई बाधित रही तो 20 लाख बैरल प्रतिदिन की कमी बनी रहेगी
  • कीमतें 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं

पश्चिम एशिया का यह युद्ध अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में महंगाई, ट्रांसपोर्ट और आम आदमी के खर्च पर सीधा असर डाल सकती हैं।

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