- सुप्रीम कोर्ट में गहमागहमी
- SIR पर खुद जिरह करने पहुंचीं सीएम ममता बनर्जी
जुबिली स्पेशल डेस्क
देश के न्यायिक इतिहास में यह शायद पहली बार देखने को मिला, जब किसी राज्य की मुख्यमंत्री अपनी ही याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में खुद पक्ष रखने के लिए पेश हुईं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी शुक्रवार को SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं, जहां कोर्ट का माहौल काफी जीवंत रहा।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल को जानबूझकर टारगेट किया जा रहा है और SIR की प्रक्रिया का इस्तेमाल केवल मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए किया जा रहा है।
चीफ जस्टिस की टिप्पणी पर कोर्ट में हंसी
सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प पल तब आया, जब कोर्ट में वकीलों की भारी भीड़ के बीच ममता बनर्जी अपने पार्टी सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी के साथ एक छोर पर खड़ी थीं। ममता ने विनम्रता से चीफ जस्टिस सूर्यकांत से कहा,“क्या मैं इसे एक्सप्लेन कर सकती हूं सर? क्योंकि मैं उसी राज्य से आती हूं।”
इस पर चीफ जस्टिस ने मुस्कुराते हुए कहा, “इस पर किसी को कोई डाउट नहीं होना चाहिए, मैडम।”यह सुनते ही कोर्टरूम में मौजूद सभी लोग हंस पड़े। ममता बनर्जी ने हाथ जोड़ते हुए कहा,
“नो सर, मैं आपकी बहुत आभारी हूं, आपकी दयालुता के लिए धन्यवाद।”
‘दरवाजों के भीतर कराह रहा है इंसाफ’
इसके बाद ममता बनर्जी ने चीफ जस्टिस, अन्य जजों और मौजूद वकीलों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनके वकील शुरू से इस केस के लिए लड़ रहे हैं, लेकिन हालात ऐसे हो गए हैं कि इंसाफ मिलता हुआ नहीं दिख रहा।
उन्होंने कहा,“जब सब कुछ खत्म कर दिया गया हो, तब हमें लगता है कि न्याय कहीं नहीं मिल रहा। मैं रवींद्रनाथ टैगोर को कोट कर रही हूं दरवाजों के भीतर इंसाफ कराह रहा है।”
ममता ने आरोप लगाया कि उन्होंने चुनाव आयोग को SIR से जुड़े मुद्दों पर छह बार पत्र लिखा, लेकिन आज तक कोई जवाब नहीं मिला।
कल्याण बनर्जी ने क्या कहा
सुनवाई के बाद TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने पत्रकारों को बताया कि ममता बनर्जी की रिट याचिका पर विस्तृत सुनवाई हुई और उन्होंने खुद अपना पक्ष मजबूती से रखा। कोर्ट ने संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर बहस के लिए और समय दिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि याचिका में दो बेहद अहम मुद्दे उठाए गए हैं, जिन पर कोर्ट को फैसला करना है।
SIR पर ममता बनर्जी के मुख्य तर्क
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पिछले चार महीनों से केवल मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है, जबकि नाम जोड़ने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई।
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माइक्रो-ऑब्जर्वर और रोल ऑब्जर्वर की नियुक्ति का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। कई रोल ऑब्जर्वर SDM रैंक के नहीं हैं और कोल इंडिया, RBI जैसी संस्थाओं से लाए गए हैं।
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सभी माइक्रो-ऑब्जर्वर BJP शासित राज्यों से भेजे गए हैं और गैर-BJP शासित राज्यों में प्रक्रिया को जल्दबाजी में लागू किया जा रहा है, जबकि BJP शासित राज्यों में SIR शुरू ही नहीं हुआ है।
कोर्ट ने सुनवाई सोमवार तक टाली
कल्याण बनर्जी ने बताया कि कोर्ट ने चुनाव आयोग से इन सभी तार्किक विसंगतियों पर ध्यान देने को कहा है। कोर्ट ने मौखिक रूप से संकेत दिया कि केवल चार दिन बचे होने के कारण सुनवाई का समय बढ़ाया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने दलील दी कि बंगाल में पर्याप्त SDM उपलब्ध नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या ग्रेड-2 अधिकारियों को सहायता के लिए लगाया जा सकता है, जिस पर ममता बनर्जी ने सहमति जताई।
अब इस मामले की अगली सुनवाई सोमवार को होगी।
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