पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर ने दुनिया को कहा अलविदा

जुबिली स्पेशल डेस्क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष और बसपा विधायक सुखदेव राजभर को लेकर बड़ी खबर आ रही है। दरअसल पूर्व अध्यक्ष सुखदेव राजभर अब इस दुनिया में नहीं रहे।

और सोमवार को सुखदेव राजभर का निधन हो गया है। पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहे थे और उनको लखनऊ के चंदन अस्पताल में भर्ती थे लेकिन सोमवार को उनकी सांसो ने उनका साथ छोड़ दिया है और उनका निधन हो गया है।

चंदन अस्पताल के एमडी डॉ. फारुख अंसारी ने बताया कि सुखदेव राजभर गुर्दे के बीमारी से पीडि़त थे। डायलसिस चल रही थी। जहां सोमवार की रात साढ़े आठ बजे उनका निधन हो गया। सुखदेव राजभर मायावती के साथ ही मुलायम और कल्याण सिंह कैबिनेट में भी मंत्री बने।

उनके निधन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ और  पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गहरा दुख प्रकट किया है।

https://twitter.com/myogiadityanath/status/1450139012933427200?s=20

मुख्यमंत्री ने कहा है कि उत्तर प्रदेश विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष एवं माननीय विधायक श्री सुखदेव राजभर जी का निधन अत्यंत दुःखद है। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान व शोकाकुल परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दुख जताते हुए ट्वीट किया, कि अत्यंत दु:खद! यूपी विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ राजनेता श्री सुखदेव राजभर जी का निधन अपूरणीय क्षति. शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना, दिवंगत आत्मा को शांति दे भगवान। सामाजिक न्याय को समर्पित आप का राजनीतिक जीवन सदैव प्रेरणा देता रहेगा. विनम्र श्रद्धांजलि!

उनके निधन पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने भी गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा है कि पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, विधायक श्री सुखदेव राजभर जी के निधन का समाचार दु:खद है. आप वंचित समाज के लिए समर्पित रहे, आपका जाना समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है. परिवारजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं. ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें।

सुखदेव राजभर पर एक नजर

  • राजभर सुखदेव लालगंज क्षेत्र से चार बार विधायक रहे
  • पहली बार 1991के विधान सभा चुनाव लड़ा था और जीत हासिल की थी
  • इसके बाद 1993 में सपा-बसपा गठबंधन की सरकार में मंत्री बने
  • 1996 के चुनाव में भाजपा के नरेन्द्र सिंह से पराजित हुए
  • हालांकि हार के बाद विधान परिषद सदस्य चुन लिए गए
  • इसके बाद साल 2002 के चुनाव और 2007 फिर से विजय हासिल की थी
  • 2012 में दीदारगंज विधान सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और सपा के आदिल शेख से चुनाव हार गए
  • 2017 में पुन: दीदारगंज से चुनाव लड़े और जीत गए।

 

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