जुबिली स्पेशल डेस्क
अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में अहम बातचीत होने जा रही है। यह वार्ता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर होगी, लेकिन एजेंडे को लेकर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद अब भी बने हुए हैं।
अमेरिका चाहता है कि बातचीत में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स और मानवाधिकार जैसे मुद्दों को भी शामिल किया जाए, जबकि ईरान इसे केवल परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को हटाने तक सीमित रखना चाहता है।
इस्तांबुल से मस्कट क्यों पहुंची वार्ता
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि वार्ताएं शुक्रवार सुबह 10 बजे मस्कट में होंगी। उन्होंने इस बैठक के आयोजन के लिए ओमान का आभार जताया।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनेर शामिल होंगे।
ओमान इस वार्ता में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दरअसल, ईरान ने अंतिम समय में स्थान को इस्तांबुल से बदलकर ओमान करने की मांग की थी और बातचीत को द्विपक्षीय स्वरूप में रखने पर जोर दिया था।
ट्रंप की प्राथमिकता कूटनीति, लेकिन चेतावनी भी
डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने की बात कही है, हालांकि बातचीत विफल होने की स्थिति में सैन्य कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। ट्रंप ने कहा है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो ईरान को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि ट्रंप ईरान की ‘शून्य परमाणु क्षमता’ की मांग पर अड़े हुए हैं और उनके पास इसके लिए “अन्य विकल्प” भी मौजूद हैं।
वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का कहना है कि किसी भी समझौते में ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, हमास और हिजबुल्लाह जैसे प्रॉक्सी संगठनों और आंतरिक दमन के मुद्दों को शामिल किया जाना चाहिए।
बातचीत के बीच सैन्य तैयारियां तेज
ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है, लेकिन अमेरिका और इजरायल इस दावे पर संदेह जताते रहे हैं। इसी बीच हाल के दिनों में क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी फाइटर जेट्स ने अरब सागर में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया, जो एक अमेरिकी जहाज के करीब आ गया था। अमेरिका ने क्षेत्र में अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किया है और हजारों अतिरिक्त सैनिकों, निगरानी विमानों व युद्धपोतों की मौजूदगी बढ़ाई है।वहीं, ईरान ने भी क्रोरमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल की तैनाती कर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है।
खाड़ी देशों की बढ़ती चिंता
इन वार्ताओं को वैश्विक स्तर पर बेहद अहम माना जा रहा है। हाल ही में बातचीत रद्द होने की अटकलें भी लगी थीं, लेकिन खाड़ी देशों समेत मध्य पूर्व के कई नेताओं के दबाव के बाद वार्ता फिर शुरू हुई।
तुर्किये के राष्ट्रपति एर्दोगन और जर्मनी के चांसलर ने तनाव कम करने की अपील की है, जबकि खाड़ी अरब देश किसी भी संभावित अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरानी हमलों को लेकर चिंतित हैं।
फिलहाल, दोनों पक्ष अपनी-अपनी ‘रेड लाइंस’ पर कायम हैं और बातचीत का नतीजा अनिश्चित बना हुआ है। असफलता की स्थिति में मध्य पूर्व में सीधे सैन्य टकराव का खतरा और बढ़ सकता है।
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