जुबिली न्यूज डेस्क
अमेरिका और ईरान के बीच आज यानी शुक्रवार को ओमान की राजधानी मस्कट में बेहद अहम बातचीत होने जा रही है। यह वार्ता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है, लेकिन इसके बावजूद दोनों देशों के बीच एजेंडे को लेकर गंभीर मतभेद बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत विफल होती है, तो मध्य पूर्व में सीधा सैन्य टकराव हो सकता है।

परमाणु मुद्दे तक सीमित रहना चाहता है ईरान
ईरान चाहता है कि बातचीत सिर्फ उसके परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाने तक सीमित रहे। वहीं अमेरिका इस बातचीत में ईरान के
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बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम
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क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स (हमास, हिजबुल्लाह)
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मानवाधिकार उल्लंघन
जैसे मुद्दों को भी शामिल करने पर अड़ा हुआ है। यही वजह है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही दोनों पक्षों के बीच तनाव साफ दिख रहा है।
मीटिंग का स्थान बदला, ओमान बना मध्यस्थ
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पुष्टि की कि यह वार्ता अब इस्तांबुल की बजाय मस्कट में होगी। ईरान ने आखिरी समय पर स्थान बदलने की मांग करते हुए द्विपक्षीय फॉर्मेट पर जोर दिया था, जिसे अमेरिका ने स्वीकार किया।
ओमान इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। अरागची ने ओमान सरकार को व्यवस्थाओं के लिए धन्यवाद भी दिया।
अमेरिकी टीम में ट्रंप के करीबी चेहरे
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में
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ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ
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राष्ट्रपति के दामाद जारेड कुशनेर
शामिल हैं। इससे साफ है कि व्हाइट हाउस इस बातचीत को रणनीतिक रूप से बेहद अहम मान रहा है।
ट्रंप की चेतावनी: कूटनीति नहीं चली तो दूसरा रास्ता भी मौजूद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति को प्राथमिकता देने की बात कही है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर वार्ता विफल हुई तो सैन्य विकल्प खुले हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान के लिए हालात “बुरे” हो सकते हैं और सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को चिंता करनी चाहिए।
व्हाइट हाउस प्रेस सचिव केरोलीन लेविट के मुताबिक, ट्रंप की मांग साफ है —
ईरान की शून्य परमाणु क्षमता (Zero Nuclear Capability)
बातचीत के बीच भी हथियारों की तैनाती
वार्ता से पहले ही दोनों देशों ने सैन्य ताकत का प्रदर्शन तेज कर दिया है:
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अमेरिकी फाइटर जेट्स ने अरब सागर में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया
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अमेरिका ने अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात किया
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हजारों अतिरिक्त सैनिक, निगरानी विमान और एयरक्राफ्ट कैरियर ईरान के आसपास भेजे गए
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जवाब में ईरान ने खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल तैनात की
खाड़ी देशों में डर, ईरानी जवाबी हमलों की आशंका
खाड़ी अरब देश इस बातचीत को लेकर बेहद चिंतित हैं। उन्हें डर है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो उसका सीधा असर उनके ठिकानों और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ सकता है। इसी वजह से कई खाड़ी देशों और मध्य पूर्वी नेताओं ने व्हाइट हाउस पर वार्ता दोबारा शुरू करने का दबाव डाला था।
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वैश्विक नजरें मस्कट पर टिकीं
तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और जर्मनी के चांसलर समेत कई वैश्विक नेताओं ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। फिलहाल बातचीत का कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है और अमेरिका-ईरान दोनों ही अपनी-अपनी रेड लाइंस पर अड़े हुए हैं।अगर यह वार्ता नाकाम रहती है, तो मध्य पूर्व में बड़े युद्ध का खतरा एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है।
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