जुबिली न्यूज डेस्क
उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने शिक्षकों और स्कूल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत देने वाला कदम उठाया है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों के स्कूल कर्मचारियों के लिए कैशलेस मेडिकल सुविधा को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना से राज्यभर में लगभग 15 लाख शिक्षकों और संबंधित कर्मियों को लाभ मिलेगा।

फायदा किसे होगा
इस योजना के तहत बेसिक शिक्षा परिषद, सरकारी सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूल, स्व-वित्तपोषित मान्यता प्राप्त स्कूलों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, शिक्षा मित्र और प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत काम करने वाले रसोइयों समेत कुल 11,95,391 लाभार्थी शामिल होंगे।
कैसे मिलेगा लाभ
स्व-वित्तपोषित स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए जिला स्तर पर सत्यापन तंत्र स्थापित किया जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता वाली समितियां लाभार्थियों का सत्यापन कर उन्हें कैशलेस मेडिकल सुविधा प्रदान करेंगी।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए भी योजना
माध्यमिक शिक्षा विभाग के तहत सरकारी और गैर-सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में काम करने वाले लगभग 2,97,579 शिक्षक इस योजना के दायरे में आएंगे। मानदेय पर काम करने वाले शिक्षक और उनके आश्रित परिवार भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
इलाज की सुविधा
लाभार्थियों को न केवल सरकारी अस्पतालों में बल्कि पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। योजना पर बेसिक शिक्षा विभाग के लिए लगभग 358.61 करोड़ रुपये और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए 89.25 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा।
मंत्रियों ने कहा
कैबिनेट बैठक के बाद वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि 32 प्रस्तावों में से 30 को मंजूरी दी गई, जबकि 2 प्रस्ताव को रोका गया। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि यह योजना शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य और कल्याण के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
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सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस योजना के लागू होने से प्रदेश के शिक्षकों को स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ी राहत मिलेगी और उन्हें इलाज के लिए भारी खर्च उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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