2 सरकारी बैंकों के विलय की तैयारी, बनेगा SBI के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक

- 25 करोड़ से ज्यादा खाताधारकों पर क्या होगा असर?
जुबिली स्पेशल डेस्क
नई दिल्ली। केंद्र सरकार बैंकिंग सेक्टर में बड़े सुधार की दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दो बड़े सरकारी बैंकों , यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (Union Bank of India) और बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India) के विलय (Merger) की योजना पर विचार चल रहा है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो देश को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के बाद दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक मिलेगा।
कैसा होगा नया बैंकिंग ढांचा?
सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय चार बड़े सरकारी बैंकों के ढांचे की ओर बढ़ना चाहता है। यानी आने वाले समय में देश में सिर्फ चार प्रमुख सरकारी बैंक ही रह जाएंगे। छोटे बैंकों को इन बड़े बैंकों में मर्ज करने की तैयारी चल रही है।
लाइवमिंट की रिपोर्ट के अनुसार, यूनियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया के विलय के बाद बनने वाला नया बैंक करीब 25.5 करोड़ खाताधारकों के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।

- यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: लगभग 21 करोड़ ग्राहक
- बैंक ऑफ इंडिया: करीब 5.5 करोड़ ग्राहक
- इन दोनों के एकीकरण के बाद यह बैंक SBI (26 करोड़ खाताधारक) से बस थोड़ा ही पीछे रह जाएगा।

खाताधारकों पर क्या असर पड़ेगा?
सरकार का दावा है कि इस मर्जर का ग्राहकों की रोज़मर्रा की बैंकिंग सेवाओं — जैसे निकासी, जमा, लोन, या एफडी की ब्याज दरों — पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा।
हालांकि, तकनीकी एकीकरण के बाद पासबुक, चेकबुक, IFSC कोड और नेट बैंकिंग आईडी बदलने की प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में ग्राहकों को बैंक शाखा जाकर कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।
सकारात्मक पक्ष यह है कि मर्जर के बाद ग्राहकों को मिलेगा
- बड़ा बैंक नेटवर्क
- ज्यादा एटीएम सुविधा
- एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म
- तेज़ लोन प्रोसेसिंग
- बेहतर ऑनलाइन सर्विस
बैंकिंग सुधारों की बड़ी रूपरेखा
सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की बैलेंस शीट को मज़बूत बनाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है। इस दिशा में इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB), सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (CBI), बैंक ऑफ महाराष्ट्र (BoM) और बैंक ऑफ इंडिया (BoI) के बीच भविष्य में भी विलय की संभावनाएं बताई जा रही हैं।
अगर यह मर्जर योजना अमल में आती है तो देश की बैंकिंग व्यवस्था में एक नया ढांचा तैयार होगा। कम बैंकों के ज़रिए अधिक कुशल, डिजिटल और मजबूत बैंकिंग प्रणाली की दिशा में यह सरकार का बड़ा कदम माना जा रहा है।


