जुबिली स्पेशल डेस्क
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूसी तेल खरीदने पर दी गई चेतावनियों का भारत पर फिलहाल कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है।
इसकी वजह यह है कि देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) लगातार रूसी कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए है।
कंपनी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को बताया कि रिलायंस फरवरी से अपने घरेलू बाजार के लिए प्रतिदिन करीब 1.5 लाख बैरल रूसी तेल खरीदेगी। रिलायंस दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स का संचालन करती है।इससे पहले रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि करीब एक महीने के अंतराल के बाद रिलायंस फरवरी और मार्च में फिर से रूसी तेल खरीदने जा रही है, वह भी प्रतिबंधों के नियमों के दायरे में रहते हुए।
दिसंबर में रिलायंस को आखिरी बार रूसी कच्चा तेल मिला था, जब अमेरिका ने कंपनी को एक महीने की अस्थायी छूट दी थी। इसी छूट के तहत रिलायंस 21 नवंबर की समय-सीमा के बाद भी रूसी तेल कंपनी रोसनेफ्ट के साथ अपना सौदा पूरा कर पाई थी।
गौरतलब है कि अमेरिका ने अक्टूबर में रोसनेफ्ट और एक अन्य रूसी कंपनी लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए थे। हालांकि, जिन रूसी कंपनियों और ट्रेडिंग बिचौलियों पर प्रतिबंध नहीं हैं, वे अब भी तेल की बिक्री कर रहे हैं।

इंडिया एनर्जी वीक के दौरान अधिकारी ने बताया कि रिलायंस फरवरी से ऐसे ही गैर-प्रतिबंधित विक्रेताओं से रोजाना 1.5 लाख बैरल तक रूसी तेल खरीदेगी।
कंपनी की नीति के चलते अधिकारी ने न तो अपना नाम बताया और न ही विक्रेताओं के नाम उजागर किए। वहीं, रॉयटर्स की ओर से भेजे गए सवालों पर रिलायंस ने तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
जामनगर रिफाइनरी और सप्लाई रणनीति
इससे पहले रिलायंस गुजरात स्थित जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स के लिए रोसनेफ्ट के साथ दीर्घकालिक समझौते के तहत रोजाना करीब 5 लाख बैरल रूसी कच्चा तेल आयात कर रही थी। इसके अलावा कंपनी सऊदी अरब और इराक से तयशुदा अनुबंधों के तहत तेल खरीदती है और कनाडा से भी कच्चे तेल की आपूर्ति लेती है।
रॉयटर्स की एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस वेनेजुएला से कच्चा तेल दोबारा आयात करने के लिए अमेरिका से मंजूरी मांग रही है। इसका उद्देश्य बड़ी रूसी तेल कंपनियों पर निर्भरता कम करना और कच्चे तेल की सप्लाई को और सुरक्षित बनाना बताया जा रहा है।
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