जुबिली स्पेशल डेस्क
वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण हासिल करने के लिए सैन्य विकल्पों की योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने स्पेशल फोर्स कमांडरों से संभावित सैन्य कार्रवाई का खाका तैयार करने को कहा है। हालांकि अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारियों ने इस कदम का खुलकर विरोध किया है और इसे मनमाना व अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया है।
डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के कुछ करीबी सलाहकार इस योजना को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं, जिनमें राजनीतिक सलाहकार स्टीफन मिलर का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।
इन सलाहकारों का मानना है कि वेनेजुएला में राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने से जुड़े कथित सफल ऑपरेशन के बाद अमेरिका को ग्रीनलैंड को लेकर भी तेजी से कदम उठाने चाहिए, ताकि रूस या चीन वहां अपना प्रभाव न बढ़ा सकें।
ब्रिटिश राजनयिकों के आकलन के मुताबिक, ट्रंप की इस रणनीति के पीछे घरेलू राजनीति भी एक बड़ी वजह है। अमेरिका में इस साल मध्यावधि चुनाव होने हैं और अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप मतदाताओं का ध्यान आर्थिक मुद्दों से हटाकर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे बड़े विषय पर केंद्रित करना चाहते हैं।
सूत्रों के अनुसार, ट्रंप ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) से ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई की संभावनाओं का अध्ययन करने को कहा है। लेकिन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने इसका विरोध करते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसा कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन होगा, बल्कि अमेरिकी कांग्रेस का भी इसे समर्थन मिलने की संभावना नहीं है।
एक सैन्य सूत्र ने बताया कि सेना के अधिकारी ट्रंप का ध्यान अन्य विकल्पों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इनमें रूस के कथित ‘घोस्ट शिप्स’ को रोकने या ईरान के खिलाफ सीमित सैन्य कार्रवाई जैसे प्रस्ताव शामिल हैं। इन जहाजों का इस्तेमाल पश्चिमी प्रतिबंधों से बचने के लिए किया जाता है।
राजनयिक हलकों में इस पूरे मामले को लेकर कई परिदृश्यों पर चर्चा हो रही है। एक संभावित स्थिति में ट्रंप राजनीतिक दबाव या सैन्य ताकत के जरिए ग्रीनलैंड को डेनमार्क से अलग करने की कोशिश कर सकते हैं। इसे सबसे गंभीर स्थिति माना जा रहा है, जो नाटो जैसे सैन्य गठबंधन को अंदर से तोड़ सकती है और उसके भविष्य पर सवाल खड़े कर सकती है।
इस बीच ट्रंप ने शुक्रवार को एक बार फिर चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया तो भविष्य में रूस या चीन वहां कब्जा जमा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि बातचीत के जरिए समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका को “कठोर रास्ता” अपनाना पड़ सकता है।
वहीं, ग्रीनलैंड के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट किया है कि वे न तो अमेरिका का हिस्सा बनना चाहते हैं और न ही डेनमार्क के अधीन रहना चाहते हैं। उनका कहना है कि ग्रीनलैंड का भविष्य वहां के लोग स्वयं तय करेंगे।
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