कतर के ‘सीक्रेट प्रपोजल’ पर मान गए ट्रंप और ईरान?

जुबिली स्पेशल डेस्क
दुनिया इस वक्त मिडिल ईस्ट में एक ऐतिहासिक कूटनीतिक बदलाव की गवाह बनने जा रही है। दशकों से एक-दूसरे के जानी दुश्मन रहे अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते (Nuclear Deal) की घोषणा अब किसी भी पल हो सकती है।
वॉशिंगटन से लेकर तेहरान तक के गलियारों में इस समय जबरदस्त कूटनीतिक सुगबुगाहट है। कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका की तरफ से भेजा गया शुरुआती ड्राफ्ट प्रपोजल ईरान को मिल चुका है और इस समय तेहरान में उच्च स्तर पर इसकी बारीकी से समीक्षा की जा रही है।
इस महा-समझौते के पीछे मध्यस्थ के रूप में कतर और पाकिस्तान की भूमिका सबसे अहम रही है। पाकिस्तानी गृह मंत्री मोहसिन नकवी बुधवार (20 मई) को खुद तेहरान पहुंचे, जहां उन्होंने ईरानी नेतृत्व के साथ बंद कमरों में लंबी बातचीत कर इस ‘शांति ज्ञापन’ को अंतिम रूप देने में मदद की।
क्या है ट्रंप का ‘एक पन्ने का फॉर्मूला’?
अंतरराष्ट्रीय मीडिया आउटलेट ‘एक्सियोस’ और ‘अल अरबिया’ के अनुसार, कतर के प्रधानमंत्री अल थानी की देखरेख में तैयार किया गया यह प्रस्ताव फिलहाल एक विस्तृत संधि नहीं, बल्कि महज ‘एक पन्ने का सहमति पत्र’ (Letter of Intent) है।
- रणनीति: योजना यह है कि पहले दोनों देश बेहद बुनियादी और मुख्य मुद्दों पर एक पन्ने के इस दस्तावेज के जरिए अपनी सहमति जता दें, ताकि दशकों का गतिरोध टूटे।
- अगला कदम: इसके बाद, इस महीने के आखिर में ‘हज’ संपन्न होने के बाद, दोनों पक्षों के शीर्ष अधिकारी एक विस्तृत (Detailed) समझौते के लिए आमने-सामने की मेज पर बैठेंगे।
जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पत्रकारों ने पूछा कि इस समझौते की घोषणा का तरीका क्या होगा, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि, “इसकी घोषणा कैसे होगी, इस पर अभी अंतिम रूप से बात नहीं हुई है।” लेकिन संकेत साफ हैं कि ईरान का जवाब आते ही दुनिया को एक बड़ी राहत की खबर मिल सकती है।
कहां फंसा है पेच? जानें दोनों पक्षों की शर्तें
भले ही कतर ने दोनों पक्षों को संतुष्ट करने वाला एक बीच का रास्ता निकाला है, लेकिन टेबल पर दोनों देशों की मांगें इस समझौते की असल परीक्षा हैं:
| अमेरिका की 3 मुख्य मांगें (US Demands) | ईरान की अपनी शर्तें (Iran’s Stand) |
| 1. परमाणु हथियार पर पूर्ण रोक: ईरान आधिकारिक रूप से यह घोषणा करे कि वह कभी भी परमाणु बम नहीं बनाएगा। | 1. मिसाइल कार्यक्रम पर नो-कमेंट: ईरान का साफ कहना है कि उसके बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर कोई बातचीत नहीं होगी। |
| 2. यूरेनियम शिफ्टिंग: ईरान अपने पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को अमेरिका शिफ्ट करे। | 2. होर्मुज पर टोल बूथ: ईरान चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ पर उसे टोल टैक्स वसूलने की मान्यता दे। |
| 3. प्रॉक्सी नेटवर्क का खात्मा: ईरान खाड़ी देशों और मिडिल ईस्ट में सक्रिय अपने सभी लड़ाके व प्रॉक्सी संगठनों को समर्थन देना बंद करे। | 3. प्रतिबंध हटाना और फ्रीज फंड: अमेरिका तुरंत ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटाए और उसके रोके गए अरबों डॉलर वापस करे। |
कतर की ‘पीस मेकर’ बनने की कोशिश
इस पूरे घटनाक्रम में कतर एक बार फिर वैश्विक मंच पर संकटमोचक बनकर उभरा है। कतर की कोशिश है कि किसी भी तरह अमेरिका और ईरान को एक मंच पर लाया जाए ताकि पूरे मिडिल ईस्ट को एक बड़े युद्ध की आग में झुलसने से बचाया जा सके। अरब अधिकारियों के मुताबिक, दोनों तरफ से आ रहे सकारात्मक बयान यह इशारा कर रहे हैं कि दोनों देश इस बार कतर के फॉर्मूले पर समझौता करने के मूड में हैं।
यदि यह समझौता सफल रहता है, तो यह डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल की सबसे बड़ी विदेश नीति की जीत होगी। हालांकि, असली चुनौती ‘हज’ के बाद होने वाली विस्तृत बैठकों में आएगी, जहां यूरेनियम और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे जटिल मुद्दों पर दोनों देशों के बीच की बारीक रेखाएं तय होंगी। दुनिया की नजरें अब तेहरान से आने वाले अंतिम जवाब पर टिकी हैं।


