Trump ने NATO को चेतावनी दी: ईरान युद्ध में सहयोग नहीं करने वाले देशों को कायर बताया

नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो देशों की ईरान युद्ध में सहयोग न देने की नीति पर तीखी नाराजगी जताई है। ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों को “कायर” करार देते हुए कहा कि अमेरिका के बिना नाटो सिर्फ कागज़ का शेर है।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ट्रंप ने लिखा कि नाटो देश तेल महंगा होने की शिकायत जरूर करते हैं, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने में मदद नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि इस मार्ग को खोलना एक आसान सैन्य कदम है और इसमें ज्यादा खतरा नहीं है, फिर भी सहयोगी पीछे हट रहे हैं।
युद्ध का प्रभाव और ट्रंप की नाराजगी
28 फरवरी से शुरू हुई अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग में अब तक हजारों लोग मारे जा चुके हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल-गैस बाजारों पर भी दिख रहा है।
ट्रंप ने खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट पर नाराजगी जताई। यह मार्ग दुनिया के तेल और गैस परिवहन का अहम हिस्सा है और फिलहाल ईरान के नियंत्रण में है। ट्रंप ने कहा कि इसी वजह से वैश्विक तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
NATO देशों का रुख
जर्मनी, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, नीदरलैंड, जापान और कनाडा ने संयुक्त बयान जारी किया है। इन देशों ने कहा कि वे समुद्री रास्तों की सुरक्षा के प्रयासों में शामिल हो सकते हैं, लेकिन युद्ध समाप्ति के बाद ही कोई कदम उठाया जाएगा।
- जर्मनी: चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि युद्ध खत्म किए बिना कोई सैन्य कदम सही नहीं होगा।
- फ्रांस: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि तनाव कम करना और अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना प्राथमिकता है। यूरोप के देशों का कहना है कि वे इस युद्ध में शामिल नहीं होना चाहते।
ट्रंप की चेतावनी
ट्रंप ने 15 और 17 मार्च को भी नाटो के रुख पर सवाल उठाए थे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि सहयोग न मिलने पर नाटो का भविष्य खतरे में पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका हर साल सहयोगी देशों की सुरक्षा पर बड़ा खर्च करता है, लेकिन युद्ध के समय वे साथ नहीं देते।



